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June 29, 2026
हिमाचल के जवान का देहरादून में निधन, 5 साल में परिवार के दोनों बेटे देश पर हुए कुर्बान
25 दिन पहले ही छुट्टी काट कर लौटा था, छह माह पहले दूसरी बार बना था पिता
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ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया है। देहरादून में ड्यूटी के दौरान भारतीय सेना के जवान विशंबर सिंह उर्फ मिंटू का निधन हो गया। इस दुखद घटना ने एक ऐसे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया हैए जिसने पिछले पांच वर्षों में देश सेवा के लिए अपने दोनों बेटों को खो दिया।
बता दें कि विशंबर सिंह के परिवार को पांच साल में यह दूसरी बार बड़ा झटका लगा है। जवान विशंबर सिंह के छोटे भाई जसविंदर सिंह भी करीब पांच साल पहले ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे। अब बड़े बेटे की मौत ने परिवार को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। सबसे भावुक करने वाली बात यह है कि विशंबर सिंह महज छह महीने पहले ही अपने दूसरे बेटे के पिता बने थे और अब दोनों मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है।
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जानकारी के अनुसार 35 वर्षीय विशंबर सिंह वर्तमान में देहरादून में भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में तैनात थे। सोमवार सुबह नियमित शारीरिक प्रशिक्षण (पीटी) के बाद उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। साथी जवान उन्हें तुरंत सेना अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान उन्हें दोबारा हृदयाघात आया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। जवान की असामयिक मृत्यु की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, जबकि पूरे कुटलैहड़ क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
परिजनों के मुताबिक विशंबर सिंह करीब 25 दिन पहले छुट्टी पर अपने पैतृक गांव मलांगड़ आए थे। उन्होंने परिवार के साथ समय बिताया और फिर वापस ड्यूटी पर लौट गए। किसी ने भी नहीं सोचा था कि घर से विदा होते समय परिवार के साथ उनकी यह आखिरी मुलाकात होगी। अब गांव में हर व्यक्ति यही कह रहा है कि कुछ दिन पहले तक जो जवान परिवार के साथ हंसता-बोलता नजर आ रहा था, आज उसकी यादें ही शेष रह गई हैं।
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विशंबर सिंह अपने पीछे माता-पिता पत्नी और दो बेटे छोड़ गए हैं। उनके पिता रसीला राम भी सेना से सेवानिवृत्त हैं। बेटे के निधन की खबर मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। माता शीला देवी और पत्नी सोनिया देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।
विशंबर सिंह अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बेटों को छोड़ गए हैं। बड़ा बेटा 10 वर्ष का है, जबकि छोटा बेटा अभी केवल 6 महीने का है। छह महीने पहले ही परिवार में दूसरे बेटे के जन्म की खुशियां आई थीं, लेकिन अब वही मासूम अपने पिता के साये से वंचित हो गया है। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि बच्चों की परवरिश और भविष्य को लेकर अब परिवार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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विशंबर सिंह के पिता रसीला राम भी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। परिवार की कई पीढ़ियां देश सेवा से जुड़ी रही हैं। यही कारण है कि गांव के लोग इस परिवार को राष्ट्रभक्ति की मिसाल मानते हैं। लेकिन लगातार दूसरी बार बेटे को खोने का दर्द इस परिवार के लिए असहनीय बन गया है। परिजन और रिश्तेदार अभी भी इस घटना पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं।
सेना अस्पताल में जवान के पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम किया जा रहा है। इसके बाद पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव मलांगड़ लाया जाएगा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। जवान को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन और सेना के अधिकारी भी अंतिम संस्कार में शामिल हो सकते हैं।
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विशंबर सिंह के निधन पर ग्राम पंचायत मलांगड़, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। क्षेत्र के लोगों ने शहीद परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट करते हुए सरकार और समाज से परिवार की हरसंभव सहायता करने की अपील की है। आज मलांगड़ गांव की आंखें नम हैं। एक ओर परिवार अपने बेटे को खोने के गम में डूबा है तो दूसरी ओर पूरा क्षेत्र अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, जिसने देश सेवा को अपने जीवन का सबसे बड़ा कर्तव्य माना।