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June 29, 2026
BREAKING: हिमाचल ने खो दिया जांबाज फौजी, पत्नी के हवाले छोड़ गया 6 माह के बेटे सहित दो मासूम
25 दिन पहले ही छुट्टी काट ड्यूटी पर लौटा था 35 वर्षीय जवान
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ऊना। वीरभूमि हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से एक बेहद भावुक और दुखद खबर सामने आई है। ऊना के बंगाणा उपमंडल की ग्राम पंचायत मलांगड़ के रहने वाले भारतीय सेना के जवान विशंबर सिंह उर्फ मिंटू का ड्यूटी के दौरान निधन हो गया। जवान की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, जबकि पूरे कुटलैहड़ क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
देश सेवा के लिए समर्पित 35 वर्षीय विशंबर सिंह वर्तमान में देहरादून में तैनात थे। सोमवार सुबह नियमित शारीरिक प्रशिक्षण (पीटी) के बाद उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। साथी जवान उन्हें तत्काल सेना के अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार के दौरान उन्हें दोबारा हृदयाघात आया और तमाम प्रयासों के बावजूद चिकित्सक उनकी जान नहीं बचा सके।
परिजनों के अनुसार विशंबर सिंह करीब 25 दिन पहले छुट्टी पर अपने पैतृक गांव मलांगड़ आए थे। उन्होंने परिवार के साथ कुछ यादगार पल बिताए और फिर अपनी ड्यूटी पर लौट गए। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि घर से विदा लेते समय परिवार की यह मुलाकात आखिरी साबित होगी। जवान की अचानक मौत ने न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है।
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विशंबर सिंह अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बेटों को छोड़ गए हैं। बड़ा बेटा अभी 10 वर्ष का है] जबकि छोटा बेटा महज 6 महीने का है। पिता की असमय मौत के बाद दोनों बच्चों के सिर से साये का हाथ उठ गया है। गांव के लोग बताते हैं कि विशंबर सिंह अपने परिवार की सबसे बड़ी ताकत थे। अब उनके जाने के बाद परिवार के सामने भावनात्मक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। विशेषकर छह महीने के मासूम बच्चे ने तो अभी अपने पिता को ठीक से पहचानना भी शुरू नहीं किया था।
इस घटना ने लोगों को इसलिए भी भावुक कर दिया है क्योंकि यह परिवार पहले भी देश सेवा में अपना एक बेटा खो चुका है। विशंबर सिंह के छोटे भाई जसविंदर सिंह भी लगभग पांच वर्ष पहले ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे। अब पांच वर्षों के भीतर इस परिवार ने अपने दोनों बेटों को देश सेवा में खो दिया है। क्षेत्र के लोग इसे असाधारण बलिदान की मिसाल बता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शायद ही कोई परिवार ऐसा होगा जिसने इतने कम समय में अपने दो जवान बेटों को देश के लिए खोया हो।
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विशंबर सिंह के पिता रसीला राम भी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। सेना और राष्ट्र सेवा इस परिवार की पहचान रही है। वर्षों तक देश की सेवा करने वाले इस परिवार ने हमेशा राष्ट्र को सर्वोपरि रखा, लेकिन अब लगातार दूसरी बड़ी क्षति ने पूरे परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह परिवार देशभक्ति, अनुशासन और सेवा की मिसाल रहा है। आज पूरा गांव उनके दुख में बराबर का सहभागी बना हुआ है।
सेना अस्पताल में जवान के पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम किया जा रहा है। संभावना है कि पार्थिव शरीर देर रात अथवा मंगलवार सुबह उनके पैतृक गांव मलांगड़ पहुंचाया जाएगा। इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। जवान को अंतिम विदाई देने के लिए गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।
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विशंबर सिंह के निधन की खबर मिलते ही ग्राम पंचायत मलांगड़, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अपूरणीय क्षति है। ग्रामीण लगातार शहीद परिवार के घर पहुंचकर संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं। लोगों ने सरकार और समाज से अपील की है कि परिवार के पुनर्वास, बच्चों की शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए हरसंभव सहयोग सुनिश्चित किया जाए।
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विशंबर सिंह और उनके भाई जसविंदर सिंह की शहादत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हिमाचल प्रदेश के सैनिक परिवार देश सेवा के लिए हर बलिदान देने को तैयार रहते हैं। एक ही परिवार के दो बेटों का पांच साल के भीतर देश के लिए समर्पित हो जाना पूरे प्रदेश के लिए गर्व और पीड़ा दोनों का विषय बन गया है। आज मलांगड़ गांव की आंखें नम हैं, लेकिन हर व्यक्ति अपने इस वीर सपूत को गर्व के साथ याद कर रहा है, जिसने मातृभूमि की सेवा को जीवन का सबसे बड़ा धर्म माना।