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January 5, 2026
अपनों को खो चुके युवाओं को मिला अपना आशियाना, सुक्खू सरकार जेब खर्च-व्यवसाय को भी दे रही पैसे
युवाओं के लिए संबल बनी सुक्खू सरकार की सुख आश्रय योजना
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। जब अपनों का साथ सिर से छीन जाए तब सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। हिमाचल प्रदेश में ऐसे ही अपनों को खो चुके जरूरतमंद युवाओं के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जिसने उनकी टूटती उम्मीदों को नया आसरा दिया है। मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना आज उन युवाओं के जीवन में रोशनी बनकर उभरी है, जिनके सिर से परिवार का साया उठ चुका था और जिनके पास न घर था, न साधन।
उपमंडल जोगिंद्रनगर के भजराला गांव के हंसराज और अक्षित कुमार इस योजना की सफलता की जीवंत मिसाल हैं। सरकार ने न केवल इन्हें खुद का आशियाना बनाने में मदद की, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की राह भी आसान की है।
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मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत प्रदेश सरकार ने हंसराज और अक्षित कुमार को आवास निर्माण के लिए पहली किस्त के रूप में एक.एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है। वर्षों से सिर पर छत के सपने देख रहे इन युवाओं के लिए यह राशि सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक है।
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सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी सरकार इनके साथ खड़ी है। योजना के अंतर्गत दोनों लाभार्थियों को हर महीने चार.चार हजार रुपये की पॉकेट मनी दी जा रही है, जिससे उनकी दैनिक आवश्यकताओं, पढ़ाई और जीवन यापन में कोई बाधा न आए।
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सुक्खू सरकार की यह योजना यहीं नहीं रुकती। हंसराज ने स्वरोजगार के लिए आवेदन किया था,जिस पर सरकार ने उन्हें 1 लाख 76 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। इस सहयोग से उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया और अब वे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।
बाल विकास परियोजना अधिकारी चौंतड़ा बालम राम वर्मा ने बताया कि जोगिंद्रनगर उपमंडल में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत अब तक चार लाभार्थियों को गृह निर्माण के लिए पहली किस्त जारी की जा चुकी है। वहीं, दो युवाओं को व्यवसाय के लिए कुल 3 लाख 76 हजार रुपये की सहायता दी गई है। इसके अलावा योजना के अंतर्गत 44 बच्चों को हर माह चार हजार रुपये पॉकेट मनी भी प्रदान की जा रही है।
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मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना उन बच्चों और युवाओं के लिए शुरू की गई है, जिन्होंने कम उम्र में माता-पिता या अपने अभिभावकों को खो दिया। सुक्खू सरकार ने ऐसे युवाओं के लिए खुद को अभिभावक की भूमिका में खड़ा किया है—घर, खर्च और रोजगार, हर स्तर पर साथ निभाने का संदेश दिया है। कुल मिलाकर, यह योजना सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उन युवाओं के जीवन को नई दिशा देने का प्रयास है, जो कभी हालात के आगे हार मानने को मजबूर थे। आज वही युवा अपने घर, अपने काम और अपने सपनों के साथ आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं।