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January 5, 2026
सुक्खू सरकार की 'जिद्द' से लगेगी विकास पर ब्रेक- पंचायत चुनाव में देरी से अटकेगी करोड़ों की ग्रांट
पंचायतों पर वित्तीय संकट गहराने की आशंका
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी से अब ग्रामीण विकास पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। नियमों के अनुसार 31 जनवरी तक चुनाव जरूरी हैं, लेकिन समय पर प्रक्रिया पूरी न होने से पंचायतों में प्रशासक व्यवस्था लागू हो सकती है। इससे केंद्र सरकार की कई योजनाओं की करोड़ों रुपये की ग्रांट अटक सकती है। विपक्ष ने इसे सुक्खू सरकार की जिद्द को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि चुनाव टलने से विकास कार्यों पर ब्रेक लग सकती है।
ऐसे में अब संभावना जताई जा रही है कि पंचायत और शहरी निकायों के चुनाव अप्रैल या मई में कराए जा सकते हैं। चुनाव तय समय पर न होने की स्थिति में पंचायती राज अधिनियम के तहत मौजूदा निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल स्वतः समाप्त हो जाएगा।
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इसके बाद सरकार को पंचायतों और निकायों में प्रशासक नियुक्त करने पड़ सकते हैं। प्रशासनिक व्यवस्था लागू होने से प्रदेश की पंचायतों पर वित्तीय संकट गहराने की आशंका है, क्योंकि कई केंद्रीय योजनाओं की राशि निर्वाचित संस्थाओं से जुड़ी होती है।
यदि समय पर त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और शहरी निकायों के चुनाव नहीं हुए, तो पंचायतों को मिलने वाली केंद्रीय सहायता प्रभावित हो सकती है। पंचायती राज कानून के तहत ग्राम पंचायतों में चुने हुए जनप्रतिनिधियों का होना आवश्यक है, ताकि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो सके। प्रशासक व्यवस्था में इन योजनाओं की राशि सीधे पंचायतों तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
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प्रदेश की पंचायतों को हर साल केंद्र सरकार से 15वें वित्त आयोग, मनरेगा, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये की मदद मिलती है। इन योजनाओं की प्रमुख शर्तों में पंचायतों में निर्वाचित निकायों का होना शामिल है। चुनाव न होने पर यह राशि या तो अटक सकती है या फिर इसके जारी होने में देरी हो सकती है, जिससे विकास कार्य प्रभावित होंगे।
यदि 31 जनवरी तक चुनाव नहीं हुए, तो वर्तमान प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने के साथ त्रिस्तरीय व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। ऐसी स्थिति में पंचायत सचिव को प्रशासक नियुक्त किया जा सकता है।
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इसके अलावा तीन सदस्यीय समिति बनाने का भी प्रावधान है, जिसमें पंचायत सचिव के साथ दो अन्य सदस्य शामिल हो सकते हैं। पंचायतों की वित्तीय लेनदेन और विकास कार्यों की जिम्मेदारी इन्हीं पर होगी।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सचिव सी. पालरासु ने स्पष्ट किया है कि, सरकार चुनाव कराने से पीछे नहीं हट रही है। यदि ग्रांट में देरी या रोक जैसी स्थिति बनती है, तो केंद्र सरकार के समक्ष पूरा मामला रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिनियम के अनुसार समय पर चुनाव न होने पर प्रशासक नियुक्त करने का प्रावधान मौजूद है। बहरहाल, चुनाव में संभावित देरी को लेकर पंचायत स्तर से जुड़े लोग और पूर्व जनप्रतिनिधि भी चिंता जता रहे हैं, क्योंकि इसका सीधा असर ग्रामीण विकास पर पड़ सकता है।