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January 5, 2026
सुख की सरकार में महंगी हुई पढ़ाई, शिक्षा बोर्ड ने बढ़ाए किताबों के दाम; जानें कितना पड़ेगा बोझ
06 से 77 रुपये तक बढ़ाए गए दाम
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शिमला। शिक्षा किसी भी क्षेत्र में विकास एकमात्र विकल्प होता है। लेकिन हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करना अब और महंगा होने वाला है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने चौथी से छठी कक्षा तक की कई पाठ्य पुस्तकों के दाम बढ़ा दिए हैं।
नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू कीमतों के तहत कुछ किताबों के दाम 06 से 77 रुपये तक बढ़ाए गए हैं। बोर्ड ने यह कदम NCERT के नए सिलेबस को लागू करने और पाठ्यक्रम में व्यापक बदलावों के चलते उठाया है।
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शिक्षा बोर्ड के अनुसार चौथी, पांचवीं और छठी कक्षा के लिए इस बार पूरी तरह नई किताबें तैयार करवाई गई हैं। NCERT की ओर से किए गए बड़े बदलावों के कारण पुस्तकों की दोबारा डिजाइनिंग, सामग्री में संशोधन और नई छपाई करानी पड़ी, जिससे प्रिंटिंग कॉस्ट में इजाफा हुआ। इसी बढ़ी हुई लागत का असर अब किताबों की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
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हालांकि राहत की बात यह भी है कि, यह बढ़ोतरी सभी कक्षाओं या सभी पुस्तकों पर लागू नहीं की गई है। सातवीं से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को इस सत्र में राहत मिलेगी, क्योंकि इन कक्षाओं के सिलेबस में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
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ऐसे में अधिकतर किताबें पिछले वर्ष के दामों पर ही उपलब्ध रहेंगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि केवल कुछ चुनिंदा पुस्तकों के दामों में ही आंशिक बढ़ोतरी की गई है, जबकि कुछ किताबों की कीमतों में कमी भी की गई है।
स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि जिन पुस्तकों की उत्पादन लागत अधिक बढ़ी है, उन्हीं के दामों में संशोधन किया गया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड का प्रयास है कि अधिकतर पाठ्य पुस्तकें विद्यार्थियों को पुराने दामों पर ही उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि अभिभावकों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
इसके बावजूद प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के लिए यह बदलाव जेब पर असर डालने वाला साबित हो सकता है, खासकर उन परिवारों के लिए जिनके एक से अधिक बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं।