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December 16, 2025
हमारे हिमाचल का अनोखा रेस्टोरेंट- जहां इंसान नहीं सिर्फ गिद्ध खाते हैं खाना, रोजाना होती है दावत
गिद्धों के लिए बनाया गया है खास रेस्टोरेंट
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कांगड़ा। देश-विदेश के ज्यादातर पर्यटकों की पहली पसंद कह जाने वाले शांत पहाड़ी राज्य हिमाचल में कई अनोखी चीजें हैं। यहां की वादियां, बड़े-बड़े पहाड़, रहन-सहन, पहनावा और खान-पान जैसी चीजें लोगों को अपनी तरफ बहुत आकर्षित करता है।
पर्यटकों के लिए यहां पर कई शानदार कैफे, रेस्टोरेंट और होटल उपलब्ध हैं। मगर क्या आप जानते हैं हिमाचल में एक ऐसा रेस्टोरेंट भी हैं- जहां इंसान नहीं सिर्फ गिद्ध खाना खाते हैं। आज के अपने इस लेख में हम आपको हिमाचल के एक ऐसे ही रेस्टोरेंट के बारे में बताएंगे।
आपको बता दें कि ये हिमाचल प्रदेश का इकलौता वल्चर रेस्टोरेंट हैं। ये रेस्टोरेंट कांगड़ा के सुखनारा गांव में स्थित है- जो कि पोंग डैम लेक वाइल्डलाइफ सेंचुरी के अंदर बनाया गया एक फीडिंग स्टेशन है।
यहां बहुत से मरे हुए जानवरों को फेंका जाता है और फिर ये वल्चर्स इनके लाशों पर ही फीड करते हैं। यह इलाका हालदून वैली का हिस्सा है और हिमाचल में गिद्धों की सबसे अधिक सक्रियता यहीं दर्ज की गई है। खासकर हिमालयन वल्चर और White-rumped Vulture की.. जो पूरे भारत में बहुत ही कम पाए जाते हैं।
बताते हैं कि 1990 से 2000 के बीच देशभर में गिद्धों की संख्या लगभग 99 प्रतिशत तक घट गई थी। जिसका कारण था एक वेटनरी दवा-डाइक्लोफेनैक। बीमार पशुओं को ये दवा दी जाती थी, उनकी मृत्यु के बाद गिद्ध उनके शव खाते थे और यही दवा उनके गुर्दे फेल कर देती थी। जिस कारण से गिद्ध की सभी प्रजातियां खतरें में आ गईं।
साल 2004 में कांगड़ा के सुखनारा क्षेत्र में गिद्ध के कुछ एक्टिव घोंसले देखें गए और फिर साल 2008 में इस जगह को आधिकारिक रूप से वल्चर रेस्टोरेंट के रूप में विकसित किया गया। अब स्थानीय लोग भी अपने मृत पशुओं को यहां लाकर छोड़ते हैं, लेकिन शर्त एक कि वो डाइक्लोफेनैक-मुक्त होने चाहिए।
बाद में यहां लाए गए शवों को एक सुरक्षित, खुले परिसर में रखा जाता है ताकि गिद्ध प्राकृतिक तरीके से भोजन कर सकें। फिर बाद में गिद्धों के संरक्षण के इस मॉडल को हरियाणा, असम और झारखंड जैसे राज्यों में भी अपनाया गया-लेकिन इस सब के बावजूद हिमाचल का सुखनारा रेस्टोरेंट आज भी गिद्ध संरक्षण की सबसे सफल मिसालों में गिना जाता है।