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January 18, 2026
खुशखबरी ! सुक्खू सरकार ने शिक्षकों को दिया तोहफा- पांच साल से सेवाएं दे रहे JBT होंगे प्रमोट
अगले महीने प्रमोट होंगे शिक्षक- शिक्षा निदेशालय ने शुरू की प्रक्रिया
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश के स्कूल शिक्षा निदेशालय ने TET उत्तीर्ण JBT को TGT कैडर में पदोन्नति देने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है।
इससे उन शिक्षकों को बड़ा लाभ मिलने जा रहा है- जो कई सालों से प्राथमिक स्तर पर पढ़ाने के बाद उच्च कक्षाओं में पढ़ाने का अवसर मिलने की प्रतीक्षा कर रहे थे। शिक्षा निदेशालय के इस फैसले के बाद से शिक्षकों में उत्साह माहौल है।
निदेशालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, TGT नॉन-मेडिकल, मेडिकल और आर्ट्स श्रेणी के पदों के लिए अस्थायी पदोन्नति पैनल तैयार कर लिया गया है। यह पदोन्नति इन-सर्विस JBT के लिए निर्धारित 15 प्रतिशत कोटे के अंतर्गत की जा रही है।
इस कोटे का उद्देश्य विभाग के भीतर कार्यरत अनुभवी शिक्षकों को आगे बढ़ने का अवसर देना है, ताकि उनकी शैक्षणिक योग्यता और अनुभव का बेहतर उपयोग हो सके।
पदोन्नति के लिए उन्हीं JBT को पात्र माना गया है, जिन्होंने TET परीक्षा उत्तीर्ण की हो और जिनके पास BSC तथा Bed. जैसी आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं हों। इसके साथ ही यह भी अनिवार्य शर्त रखी गई है कि संबंधित शिक्षक ने 31 दिसंबर तक नियमित सेवा के कम से कम पांच वर्ष पूरे कर लिए हों। इन मापदंडों के आधार पर ही विभाग ने पात्र शिक्षकों की सूची तैयार की है।
निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि अस्थायी पदोन्नति पैनल पूरी तरह से मेरिट के आधार पर तैयार किया गया है। मेरिट तय करने में JBT के रूप में नियुक्ति का वर्ष और JBT परीक्षा में प्राप्त अंकों को मुख्य आधार बनाया गया है। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी भी तरह की मनमानी की गुंजाइश न हो।
विभाग की ओर से जारी पैनल को लेकर अगर किसी शिक्षक को कोई आपत्ति या संशोधन करवाना हो, तो इसके लिए 15 फरवरी तक का समय निर्धारित किया गया है। इस अवधि के भीतर शिक्षक अपने संबंधित दस्तावेजों के साथ आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम पदोन्नति पैनल जारी किया जाएगा।
शिक्षा विभाग के इस कदम से प्रदेश के हजारों JBT में उत्साह का माहौल है। शिक्षकों का मानना है कि इससे न केवल उनके करियर को नई दिशा मिलेगी, बल्कि सरकारी स्कूलों में उच्च कक्षाओं के लिए योग्य और अनुभवी शिक्षक उपलब्ध होंगे- जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।