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August 30, 2026
सुक्खू सरकार ने बदला टैक्स सिस्टम, अब लगेगा 'अनाथ और विधवा उपकर' जानें कितना पड़ेगा जेब पर बोझ
हिमाचल में अब निर्धारित टैक्स के साथ जुड़ेगा अनाथ और विधवा सेस
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने राज्य की कर व्यवस्था में एक अहम बदलाव करते हुए ‘अनाथ एवं विधवा उपकर’ को टैक्स स्ट्रक्चर का हिस्सा बना दिया है। सरकार का यह कदम सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए प्रावधानों के लागू होने के बाद जहां-जहां वैट देय होगा, वहां निर्धारित टैक्स के साथ नए उपकर से जुड़े प्रावधान भी लागू होंगे।
इस बदलाव का सबसे सीधा असर पेट्रोल, डीजल और उनसे संबंधित कारोबार पर देखने को मिल सकता है। खास तौर पर पेट्रोल-डीजल के थोक एवं खुदरा कारोबारियों के लिए टैक्स रिटर्न, चालान और बिलिंग की प्रक्रिया में अब अतिरिक्त विवरण दर्ज करना होगा।
हिमाचल प्रदेश राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने 25 अगस्त को इस संबंध में अधिसूचना जारी की थी। अब विभाग ने अधिसूचना को सभी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही राज्य के टैक्स सिस्टम में अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए राजस्व जुटाने वाला नया प्रावधान प्रभावी हो गया है। सरकार के इस फैसले को सामाजिक सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। यानी टैक्स व्यवस्था के जरिए सरकार ऐसे वर्गों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की कोशिश कर रही है, जिन्हें सरकारी सहायता और सामाजिक संरक्षण की अधिक आवश्यकता होती है।
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नए प्रावधानों के लिए हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्धित कर नियम, 2005 में संशोधन किया गया है। संशोधित नियमों को हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्धित कर (संशोधन) नियम, 2026 कहा गया है। अधिसूचना के तहत टैक्स भुगतान और रिफंड से जुड़े नियम 40, 40(बी), 42 और 44 में बदलाव किए गए हैं। अब वैट से संबंधित भुगतान प्रक्रिया में नए उपकर को भी निर्धारित तरीके से दर्ज करना होगा। करदाताओं को मैनुअल भुगतान अथवा ई-पेमेंट के माध्यम से टैक्स जमा करते समय नए उपकर से संबंधित प्रावधानों का भी पालन करना होगा।
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नए टैक्स रिटर्न फॉर्म में किए गए प्रावधानों से साफ है कि पेट्रोल, डीजल और संबंधित वस्तुओं की प्रति किलोलीटर बिक्री इस बदलाव के प्रमुख दायरे में रहेगी। इसका मतलब है कि पेट्रोलियम उत्पादों के कारोबार से जुड़े थोक विक्रेताओं और खुदरा कारोबारियों को अपनी टैक्स रिपोर्टिंग में नए उपकर का विवरण भी शामिल करना होगा। हालांकि, आम उपभोक्ता पर इसका वास्तविक वित्तीय असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उपकर की निर्धारित दर किस प्रकार लागू होती है और उसका भार कारोबारियों से उपभोक्ताओं तक किस स्तर पर पहुंचता है।
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सरकार की ओर से इस उपकर का उद्देश्य सामाजिक कल्याण के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना बताया जा रहा है, लेकिन आम जनता की नजर सीधे तौर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर रहेगी। यदि अतिरिक्त कर लागत का कोई हिस्सा कारोबारियों द्वारा अंतिम कीमत में समायोजित किया जाता है तो इसका अप्रत्यक्ष असर परिवहन और माल ढुलाई की लागत पर भी पड़ सकता है।
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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में होने वाला कोई भी अतिरिक्त प्रभाव आगे चलकर परिवहन, लॉजिस्टिक्स और कुछ वस्तुओं की लागत को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि, नए उपकर को लागू किए जाने का उद्देश्य सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाना नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण के लिए राजस्व जुटाना है। इसलिए उपभोक्ताओं पर वास्तविक प्रभाव का आकलन लागू दर और बाजार में उसके समायोजन के बाद ही स्पष्ट होगा।
नए उपकर को टैक्स प्रणाली में पारदर्शी तरीके से दर्ज करने के लिए विभाग ने कई पुराने फॉर्म को बदल दिया है। अब VAT-2, VAT-2A, VAT-15, VAT-15A और VAT-18 जैसे नए फॉर्म इस्तेमाल किए जाएंगे। इन नए फॉर्म में वैट के साथ-साथ अनाथ एवं विधवा उपकर को दर्शाने के लिए अलग कॉलम उपलब्ध कराया गया है। व्यापारियों और अन्य संबंधित करदाताओं को चालान, टैक्स रिटर्न और टैक्स इनवॉइस तैयार करते समय इन प्रावधानों का पालन करना होगा। इससे विभाग को यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि वैट के साथ नए उपकर के रूप में कितनी राशि जमा हुई है।
राज्य कर एवं आबकारी विभाग के अनुसार संशोधित नियम हिमाचल प्रदेश राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से पूरे प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इस बदलाव के साथ हिमाचल की टैक्स व्यवस्था में एक नया सामाजिक कल्याण आधारित राजस्व स्रोत जुड़ गया है। सरकार की कोशिश है कि टैक्स से जुटाए जाने वाले अतिरिक्त संसाधनों का इस्तेमाल अनाथ बच्चों और विधवा महिलाओं के कल्याण से जुड़े कार्यों में किया जा सके।