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January 11, 2026

CM सुक्खू के सख्त फैसलों से भरने लगा खाली खजाना, इस विभाग ने 300 करोड़ का अर्जित किया राजस्व

31 दिसंबर 2025 तक एचपीएसईबीएल ने 300 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया

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Himachal Electricity Board

शिमला। हिमाचल प्रदेश में "व्यवस्था परिवर्तन" का नारा अब महज राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने लगा है। सत्ता में आने के बाद सख्त और कई बार अलोकप्रिय फैसले लेने वाली सुक्खू सरकार के निर्णय अब नतीजे देने लगे हैं। खासतौर पर बिजली क्षेत्र में किए गए सुधारों का असर सामने आया है, जहां हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड ;एचपीएसईबीएलद्ध ने रिकॉर्ड राजस्व अर्जित कर सरकार की नीति को सही ठहराया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू खुद पहले कह चुके हैं कि उनके फैसले आंवले के स्वाद जैसे होंगे, जिनका असर बाद में दिखेगा और अब वही असर नजर आने लगा है।

बिजली बोर्ड की कमाई में बड़ा उछाल

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक एचपीएसईबीएल ने 300 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, जबकि इससे पहले 31 दिसंबर 2024 तक यह आंकड़ा 206 करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी राज्य सरकार की व्यवस्था परिवर्तन नीति, पारदर्शी प्रशासन और कड़े वित्तीय अनुशासन का परिणाम है। वर्षों से घाटे और अव्यवस्था से जूझ रहे बिजली क्षेत्र को अब सुधारों की नई दिशा मिली है।

 

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सख्त फैसलों का असर अब सामने

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए कि सरकार द्वारा लिए गए सख्त फैसलों का असर अब दिखना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि बिजली सब्सिडी को लेकर सरकार को कठिन निर्णय लेने पड़े। हर वर्ग को मिल रही 125 यूनिट मुफ्त बिजली पर कैंची चलाने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन राज्य की आर्थिक सेहत के लिए यह जरूरी था। आज उसी निर्णय का नतीजा राजस्व में बढ़ोतरी के रूप में सामने है।

आधुनिक तकनीक से मजबूत हुई बिजली व्यवस्था

सरकार ने बिजली व्यवस्था को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश विद्युत ग्रिड कोड लागू किया है। इससे ग्रिड की सुरक्षा बढ़ी है और बिजली आपूर्ति पहले से ज्यादा स्थिर और निर्बाध हुई है। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए शिमला और धर्मशाला में डेढ़ लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे लोग मोबाइल ऐप के जरिए अपनी रोजाना बिजली खपत की जानकारी ले सकेंगे।

 

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नुकसान घटा, खर्च में भारी बचत

औद्योगिक क्षेत्रों, खासकर काला अंब में एससीएडीए प्रणाली लागू होने से बिजली नुकसान में करीब चार प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, डिजिटल सुधारों और पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अपनाने से बिजली बिलिंग और आईटी सेवाओं पर होने वाला सालाना खर्च 46 प्रतिशत तक घटा है। पुराने और महंगे अनुबंधों को खत्म कर सरकार ने बड़ी वित्तीय बचत की है।

युवाओं को रोजगार, सेवाओं में तेजी

मुख्यमंत्री ने कहा कि एचपीएसईबीएल के फील्ड कर्मचारी बिजली व्यवस्था की रीढ़ हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बोर्ड में 2,100 से अधिक युवाओं की भर्ती को मंजूरी दी है। इनमें 1,602 बिजली उपभोक्ता मित्र और 500 जूनियर टी-मेट्स शामिल हैं, जिससे मरम्मत कार्यों में तेजी आएगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।

 

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व्यवस्था परिवर्तन का असर जमीन पर

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार के ये सभी कदम न केवल बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देंगे, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगे। उन्होंने दोहराया कि व्यवस्था परिवर्तन के तहत लिए गए फैसलों का असर धीरे.धीरे सामने आएगा और प्रदेश को इसका दीर्घकालीन लाभ मिलेगा।

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