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March 6, 2025

हिमाचल PWD विभाग सवालों के घेरे में, 3 किलोमीटर सड़क मरम्मत में लगा दिए 10 टेंडर

जानबूझकर ऑनलाइन ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से बचने के लिए किया कारनामा

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HIMACHAL NEWS

शिमला। हिमाचल लोक निर्माण विभाग ने शिमला सर्किल के अंतर्गत उक्हरो-नेहरा सड़क की मरम्मत और फथाची सड़क के निर्माण के लिए कुल 10 अलग-अलग टेंडर जारी किए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 10 लाख रुपये है। हर एक टेंडर 97,000 रुपये का है, जिससे यह साफ़ हो रहा है कि विभाग ने जानबूझकर ऑनलाइन ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से बचने के लिए इन टेंडरों को छोटे हिस्सों में विभाजित किया है। 

छोटे टेंडरों की प्रक्रिया में गोलमाल

सरकार ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं कि एक लाख रुपये या उससे अधिक के कामों के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अनिवार्य होगी। इसके बावजूद, लोक निर्माण विभाग ने उक्हरो-नेहरा और फथाची सड़क जैसे कार्यों को इतने छोटे हिस्सों में बांट दिया कि प्रत्येक टेंडर की राशि 1 लाख रुपये से कम हो गई और सभी टेंडर ऑफलाइन ही जारी हो गए। इससे यह सवाल उठता है कि क्या विभाग ने जानबूझकर पारदर्शी ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से बचने के लिए यह कदम उठाया है।

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 ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने का तरीका

जनता का सवाल है कि जब कोई काम 10 लाख रुपये का होता है, तो उसे एक ही टेंडर में निकलने से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि काम की गुणवत्ता बनी रहे और उसका सही तरीके से निगरानी हो। लेकिन जब इतने बड़े काम को छोटे-छोटे टेंडरों में बांट दिया जाता है, तो यह मुश्किल हो जाता है कि यह तय किया जा सके कि कौन ठेकेदार किस हिस्से का निर्माण कर रहा है और उसकी जिम्मेदारी क्या होगी। इस तरह से काम की निगरानी और गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है, और यह एक जोखिम बन सकता है।

गुणवत्ता में समझौता

छोटे टेंडरों का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इससे काम की गुणवत्ता में कमी आ सकती है। छोटे ठेकेदारों के पास जरूरी संसाधन नहीं होते, जिससे काम अधूरी गुणवत्ता में पूरा हो सकता है। यही कारण है कि शिमला में पहले भी देखा गया है कि सड़कों की मरम्मत पैचवर्क के जरिए की जाती है, लेकिन बारिश के बाद वे फिर से खराब हो जाती हैं। इस प्रकार के कामों में गुणवत्ता की कमी का असर लंबे समय में सामने आता है।

भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा भी हो सकती है।

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क्षेत्रीय निवासियों की मांग

शिमला के क्षेत्रीय लोग इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इन कार्यों को एक ही बड़े टेंडर में शामिल किया जाए ताकि काम की निगरानी और गुणवत्ता बनी रहे। वे यह भी मानते हैं कि छोटे टेंडरों के कारण निर्माण कार्यों की स्थायित्व और गुणवत्ता पर समझौता किया जा सकता है।

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लोक निर्माण विभाग का पक्ष

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता, राजेश अग्रवाल ने इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विभाग टेंडर प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरत रहा है। उनका कहना है कि विभाग ने छोटे-छोटे कामों के लिए अलग-अलग टेंडर जारी किए हैं ताकि प्रत्येक कार्य की सही तरीके से निगरानी हो सके। हालांकि, क्षेत्र के लोग अब भी एक ही बड़े टेंडर के जरिए इन कामों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं, ताकि काम की गुणवत्ता और स्थायित्व पर ध्यान दिया जा सके।

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