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September 9, 2025

पीएम मोदी ने हिमाचल के किसानों से लेकर पशुपालकों तक को दी राहत, इस तरह मिलेगी मदद

हिमाचल को फिर से बसाने के लिए छह तरीकों से मदद करेगा केंद्र

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Pm modi himachal farmer

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं से मची तबाही के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को प्रदेश को बड़ी राहत प्रदान की। उन्होंने सबसे पहले हवाई सर्वेक्षण के जरिए प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और उसके बाद धर्मशाला में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पीएम ने प्रभावित परिवारों और किसानों के लिए राहत पैकेज की कई अहम घोषणाएं कीं। इस दौरान पीएम मोदी ने ना सिर्फ आपदा पीड़ितों बल्कि किसानों बागवानों और पशुपालकों के लिए भी बड़ी घोषणाएं की। 

 

यह भी पढ़ें : पीएम मोदी बोले - हिमाचल को फिर से करेंगे खड़ा, अपने दूसरे घर के लिए कर गए कई बड़ी घोषणाएं

 
भारी बारिश और आपदा से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहत और पुनर्वास पैकेज की घोषणा की है। केंद्र सरकार प्रदेश को ₹1500 करोड़ की वित्तीय सहायता देगी। इसके साथ ही एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन कोष) की दूसरी किस्त अग्रिम रूप से जारी की जाएगी और किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि भी जारी की जाएगी।

1. वित्तीय सहायता और राहत पैकेज

• हिमाचल को ₹1500 करोड़ की सहायता राशि दी जाएगी।
• एसडीआरएफ की दूसरी किस्त अग्रिम जारी।
• किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की राशि समय से पहले उपलब्ध कराई जाएगी।
 

प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरे क्षेत्र और जनता को फिर से खड़ा करने के लिए कई स्तरों पर काम होगा:

• प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत क्षतिग्रस्त घरों का पुनर्निर्माण।
• राष्ट्रीय राजमार्गों की बहाली और यातायात व्यवस्था दुरुस्त करना।
• स्कूलों का पुनर्निर्माण, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
• प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से राहत।
• पशुपालकों के लिए मिनी किट्स की आपूर्ति।

3. कृषि एवं किसानों के लिए विशेष मदद

• जिन किसानों के पास बिजली कनेक्शन नहीं है, उन्हें अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।
• कृषि को फिर से पटरी पर लाने के लिए विशेष पैकेज तैयार किया गया है।
 

4. तकनीकी पहल: जियो-टैगिंग

• प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत क्षतिग्रस्त घरों का जियो-टैगिंग किया जाएगा।
• इससे नुकसान का सटीक आकलन होगा।
• प्रभावित परिवारों तक तेजी से मदद पहुँच सकेगी।
• स्कूलों में भी जियो-टैगिंग से क्षति का सही आकलन कर,
• समग्र शिक्षा अभियान के तहत त्वरित सहायता दी जाएगी।
 

5. जल प्रबंधन और संरचना

• वॉटर हार्वेस्टिंग के लिए रिचार्ज स्ट्रक्चर बनाए जाएंगे।
• वर्षा जल को संग्रहित कर भू-जल स्तर सुधारने और बेहतर जल प्रबंधन सुनिश्चित करने की दिशा में काम होगा।

6. केंद्र सरकार की पहल

• केंद्र ने पहले ही अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमों को हिमाचल भेजा है।
• यह टीमें क्षति का विस्तृत आकलन कर रही हैं।
• उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे और वित्तीय सहायता दी जाएगी।
 

सुक्खू सरकार ने पीएम के समक्ष रखी चार मुख्य मांगें

  • सरकार ने कहा कि इस आपदा ने प्रदेश को ₹4,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान दिया है और राज्य अपने दम पर इससे उबर नहीं सकता।
  • दूसरी मांग वन अधिकार कानून में छूट को लेकर थी। पहाड़ी राज्यों के लिए सख़्त नियम राहत कार्यों में अड़चन बनते हैंए इसलिए हिमाचल ने केंद्र से इस कानून में लचीलापन लाने का प्रस्ताव रखा।
  • तीसरी मांग भूमि आवंटन और पुनर्वास के नियमों में ढील को लेकर थी। पहाड़ों से विस्थापित परिवारों को सुरक्षित जगह बसाने के लिए आसान प्रावधान ज़रूरी बताए गए।
  • चौथी मांग राहत वितरण के मौजूदा नियमों में संशोधन की थीए ताकि प्रभावित लोगों तक मुआवज़ा और सहायता जल्द और पारदर्शी ढंग से पहुँच सके। यानी सरकार की पूरी कोशिश यही रही कि हिमाचल को इस संकट से उबारने के लिए न केवल धनराशि मिले बल्कि ऐसे नियम भी बदले जाएं जो राहत की गति को रोकते हैं। 

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