#विविध
January 4, 2026
HRTC चालक ने वॉल्वो को बना दिया एंबुलेंस, पहुंचा दी अस्पताल; बचा ली पूर्व फौजी की जिंदगी
एचआरटीसी वॉल्वो के चालक परिचालक ने पेश इंसानियत की मिसाल
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शिमला। कभी-कभी जिंदगी और मौत के बीच फर्क सिर्फ कुछ मिनटों, सही फैसले और संवेदनशील दिलों का होता है। न सायरन, न एंबुलेंस की चमकती लाइटें और न ही कोई वीआईपी इंतजाम, बस सड़क पर दौड़ती एक एचआरटीसी वॉल्वो और उसमें सवार कुछ ऐसे लोग, जिन्होंने वक्त आने पर इंसानियत को सबसे आगे रख दिया। सड़कों पर यह दृश्य सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि मानवता की वह मिसाल बन गया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
कटरा से शिमला की ओर जा रही हिमाचल पथ परिवहन निगम की वॉल्वो बस (HP-63-8671) अपने तयशुदा रूट पर आगे बढ़ रही थी। यात्री रोज़ की तरह सफर में मशगूल थे कि अचानक बस में सवार हमीरपुर जिला के नादौन निवासी एक बुजुर्ग सेवानिवृत्त फौजी अमरनाथ की तबीयत बिगड़ गई। देखते ही देखते उनकी हालत गंभीर हो गई। चेहरे पर दर्द, सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी ने माहौल को गम्भीर बना दिया। हर गुजरता पल उनकी जिंदगी पर भारी पड़ रहा था।
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स्थिति की गंभीरता को सबसे पहले भांपा बस के परिचालक अनिल कुमार निवासी सरकाघाट ने। बिना घबराए उन्होंने तत्काल चालक दिनेश कुमार निवासी सोलन को हालात से अवगत कराया। दोनों ने एक पल में यह फैसला किया कि समय.सारणी, रूट और नियमों से ऊपर एक इंसान की जान है। इसके बाद वॉल्वो बस को बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल की ओर मोड़ दिया गया। उस क्षण वॉल्वो बस एक साधारण यात्री वाहन नहीं, बल्कि चलती.फिरती एंबुलेंस बन चुकी थी।
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चालक दिनेश कुमार ने पूरी सूझबूझ, सतर्कता और तेज़ी के साथ बस को अस्पताल तक पहुंचाया। डॉक्टरों ने समय पर उपचार शुरू किया और बाद में बताया कि अगर कुछ मिनटों की भी देरी होती, तो परिणाम घातक हो सकता था। सही समय पर अस्पताल पहुंचने से पूर्व फौजी की जान बच गई। जब इस बारे में चालक से बात की गई तो उन्होंने विनम्रता से कहा हमने सिर्फ अपना फर्ज निभाया है।
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इस मानवीय प्रयास में बस में सवार यात्रियों का सहयोग भी काबिल.ए.तारीफ रहा। किसी ने रूट बदलने या देरी पर आपत्ति नहीं जताई। सभी की एक ही भावना थी, अगर किसी की जान बच सकती है, तो कुछ मिनटों की देरी कोई मायने नहीं रखती। बस में सफर कर रहे सेना के तीन जवान भी मानवता की मिसाल बने। उन्होंने बीमार फौजी की देखभाल की, परिचालक को हर संभव मदद दी और एक जवान ने मोबाइल के जरिए अस्पताल की लोकेशन खोजकर समय रहते सहायता सुनिश्चित की।
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इलाज के बाद जब बुजुर्ग फौजी की हालत स्थिर हुई, तो बस उन्हें सुरक्षित नादौन तक लेकर पहुंची और फिर उनके घर छोड़ा गया। यह घटना केवल एक व्यक्ति की जान बचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जज्बे और संवेदनशीलता का प्रमाण है, जो आज भी समाज में जीवित है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब इस वॉल्वो बस की इस जोड़ी ने इंसानियत की मिसाल पेश की हो। इससे पहले 28 दिसंबर 2025 को दिल्ली से शिमला आ रही इसी बस में एक एनआरआई युवती की तबीयत बिगड़ गई थी। उस समय भी चालक दिनेश कुमार और परिचालक अनिल कुमार ने तत्परता दिखाते हुए प्राथमिक उपचार और 108 एंबुलेंस की व्यवस्था कर युवती की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।