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January 4, 2026
सुक्खू सरकार मंदिरों के धन से करेगी हिमाचल के विकास कार्य, हाईकोर्ट जाने की तैयारी
सुक्खू सरकार मंदिर निधि उपयोग पर लगाई रोक हटाने को दायर करेगी याचिका
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ऊना। हिमाचल प्रदेश के मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और उसके उपयोग को लेकर एक बार फिर सियासत गरमाने वाली है। सुक्खू सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह मंदिरों के धन को केवल धार्मिक परिसरों तक सीमित रखने के पक्ष में नहीं है, बल्कि इस निधि का उपयोग समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण और प्रदेश के समग्र विकास के लिए भी किया जाना चाहिए। इसी मुद्दे पर हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में लगाई गई रोक को हटाने के लिए राज्य सरकार अब पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी में है।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का कहना है कि हिमाचल के मंदिरों से प्राप्त धन का इस्तेमाल केवल मंदिरों के सौंदर्यीकरण या श्रद्धालुओं की सुविधाओं तक सीमित नहीं है। यह राशि गरीब और जरूरतमंद लोगों के इलाज, मेधावी विद्यार्थियों की शिक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास, गौशालाओं के संचालन और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग में भी खर्च की जाती है। देश के कई बड़े और प्रतिष्ठित मंदिर पहले से ही स्कूल, कॉलेज और अस्पताल जैसे संस्थान चला रहे हैं, ऐसे में हिमाचल में इस व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
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डिप्टी सीएम ने ऊना जिले के चिंतपूर्णी क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अक्टूबर माह में अदालत द्वारा मंदिर निधि के सरकारी उपयोग पर लगाई गई रोक के बाद कई जनहितकारी योजनाएं प्रभावित हुई हैं। सरकार का मानना है कि संभवतः न्यायालय के समक्ष सरकार का पक्ष पूरी मजबूती से नहीं रखा जा सका, इसलिए अब पुनर्विचार याचिका के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
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उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि चिंतपूर्णी मंदिर सहित प्रदेश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों की आय से आसपास के क्षेत्रों के विकास को गति मिली है। चिंतपूर्णी मंदिर के विकास के लिए लगभग 150 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिन्हें किसी भी सूरत में रुकने नहीं दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिरों की पवित्रता बनी रहे और साथ ही उनका योगदान समाज के व्यापक हित में भी हो।
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इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष पहले भी सुक्खू सरकार के फैसलों पर तीखा विरोध जता चुका है। मंदिरों के धन के उपयोग को लेकर विधानसभा से लेकर सड़कों तक हंगामा हुआ था और विपक्ष ने सरकार पर धार्मिक आस्था से खिलवाड़ करने के आरोप लगाए थे। अब पुनर्विचार याचिका की तैयारी के साथ यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ा सकता है।
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चिंतपूर्णी मेले को लेकर उठे सवालों पर भी उपमुख्यमंत्री ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जब कुल्लू दशहराए मंडी शिवरात्रि और चंबा का मिंजर मेला राज्य स्तर पर पहचान बना सकते हैंए तो माता चिंतपूर्णी के मेले पर आपत्ति क्यों। पिछले दो वर्षों में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ इस मेले की लोकप्रियता और धार्मिक महत्व को स्वयं सिद्ध करती है।
उन्होंने प्रशासन को आने वाले वर्षों में चिंतपूर्णी महोत्सव को और अधिक भव्य बनाने, भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को विस्तार देने के निर्देश भी दिए।