#विविध
April 16, 2026
हिमाचल: बेबस मां-बाप का एक ही सवाल...'आखिर हमारी सिया को क्यों मा*रा'? साजिश की जताई आशंका
पिता बोले:गुस्से में उठाया कदम नहीं, जताई गहरी साजिश की आशंका
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सरकाघाट (मंडी)। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सरकाघाट की शांत वादियों में इन दिनों सन्नाटा नहीं, बल्कि एक रूह कंपा देने वाली खामोशी पसरी है। कॉलेज के लिए घर से हंसते-खेलते निकली सिया आज एक तस्वीर बनकर दीवार पर टंग गई है। चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन देवभूमि के सीने पर लगी यह खरोच अब नासूर बनती जा रही है। सिया के घर में मातम ऐसा है कि पत्थर भी पिघल जाएं। उसकी मां की पथराई आंखें आज भी घर के मुख्य द्वार को निहार रही हैं, शायद इस उम्मीद में कि उनकी लाड़ली कहेगी- "मां, मैं आ गई।"
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इस झकझोर कर रख देने वाली घटना ने ना सिर्फ एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी, बल्कि पूरे समाज को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल सिया के माता-पिता की आंखों में तैर रहा है। आखिर हमारी बेटी ने किसी का क्या बिगाड़ा था।
सिया के माता और पिता जोगेंद्र गुलेरिया की हालत देख हर आंख नम है। हाथों में बेटी की तस्वीर लिए वह कभी उसे सीने से चिपकाते हैं, तो कभी आसमान की तरफ शून्य में ताकते हैं। माता-पिता का दर्द इंसाफ की मांग से कहीं आगे निकल चुका है। रुंधे गले से वह बस एक ही सवाल दोहराते हैं- हमे इंसाफ नहीं, बस यह जवाब चाहिए कि आखिर क्यों? मेरी बेटी ने किसी का क्या बिगाड़ा था? वह तो अपना भविष्य बुनने कॉलेज गई थी, फिर उसे दराट से क्यों काटा गया.. उनके इस सवाल के सामने पूरा प्रशासन और समाज निरुत्तर है।
इस निर्मम हत्याकांड ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिया पर दराट से एक-दो नहीं, बल्कि सात बार प्रहार किए गए। घावों की गहराई चीख-चीख कर कह रही है कि हमलावर के सिर पर खून सवार था। परिजनों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इतनी क्रूरता अचानक पैदा हुए गुस्से का नतीजा नहीं हो सकती। परिजनों ने आशंका जताई है कि इस जघन्य कृत्य के पीछे कोई 'ठोस साजिश' या 'गहरा षड्यंत्र' छिपा है। क्या कोई पुरानी रंजिश थी? या फिर यह एक सुनियोजित शिकार था? ये सवाल अब पुलिस की फाइलों में सुलग रहे हैं।
घर की जिस रौनक से सुबह की शुरुआत होती थी, वहां अब सिर्फ सिसकियां हैं। सिया की मां बार-बार बेसुध हो रही हैं। होश आते ही वह सिया का नाम पुकारती हैं और फिर बेहोश हो जाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सिया बेहद सौम्य और होनहार छात्रा थी। उसका किसी से कोई बैर नहीं था। जिस पगडंडी पर वह रोज चलती थी, वहां अब खून के धब्बे और लोगों का गुस्सा बिखरा पड़ा है।
इस वारदात ने सरकाघाट के हर घर में डर पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर ऐसी निर्मम हत्या के पीछे छिपे हर चेहरे को बेनकाब नहीं किया गया, तो यह मानवता के साथ सबसे बड़ा मजाक होगा। लोग मांग कर रहे हैं कि मामले की फास्ट ट्रैक जांच हो और अपराधी को ऐसी सजा मिले जो मिसाल बन जाए।
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हालांकि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन 'साजिश' वाले एंगल ने पुलिस की चुनौती बढ़ा दी है। एसपी मंडी और स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर संभावित कड़ी को जोड़ा जा रहा है। क्या आरोपी का कोई मददगार था? क्या यह हत्या किसी रंजिश का परिणाम थी? पुलिस इन सभी पहलुओं पर तफ्तीश कर रही है।
सिया की मौत ने देवभूमि के दामन पर ऐसा दाग लगा दिया है जिसे धोना आसान नहीं होगा। वह तो चली गई, लेकिन पीछे छोड़ गई है अपने पिता के वो अनुत्तरित सवाल और एक मां का कभी न खत्म होने वाला इंतजार। अब देखना यह है कि क्या हमारा सिस्टम सिया के पिता को वो 'जवाब' दे पाता है, जिसकी तलाश में उनकी आंखें सूख चुकी हैं।