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March 25, 2025
नेताओं के करीबियों ने ही लूट लिया हिमाचल का यह बैंक, कंगाली की कगार पर पहुंचा
बैंक का NPA बढ़कर 22 प्रतिशत पर पहुंचा
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कांगड़ा। करोड़ों के लोन घोटाले में जांच का सामना कर रहे कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक का NPA बढ़कर 22 प्रतिशत हो चुका है। बैंक की जमा पूंजी कास 25 फीसदी पैसा नेताओं के करीबी ऐसे लोन डिफॉल्टरों के पास फंसा है, जिनसे रिकवरी भी नहीं हो पा रही है। ये ऐसे लोन डिफॉल्टर हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक रसूख के बल पर बैंक से लोन लिया, लेकिन अब वे लोन की किस्तें नहीं चुका रहे हैं। उनसे वसूली बैंक के लिए भी मुश्किल बन गई है।
NPA से हुए घाटे की भरपाई करने के लिए बैंक अब अपने लाभांश का उपयोग कर रहा है। यानी बैंक को हर साल होने वाले मुनाफे का पैसा घाटे की भरपाई में लगाना पड़ रहा है, ताकि दिवालिएपन की स्थिति न आए। आपको बता दें कि बैंक की यह हालत लंबे समय से है। करोड़ों रुपए के लोन घोटाले में बैंक के कुछ कर्मचारी भी शामिल हैं। इस मामले की विजिलेंस जांच हुई है और अब यह जांच सीबीआई को सौंपी जानी है।
बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की हालिया बैठक में लोन डिफॉल्टरों का मुद्दा उठा, जिन्हें जरूरत से ज्यादा लोन बांट दिए गए, लेकिन अब वे लोन नहीं चुका रहे हैं। इनमें एक कारोबारी ऐसा है जिससे बैंक ने 28 करोड़ रुपये वापस लेने हैं। इसी तरह एक अन्य कारोबारी है, जिसे बैंक ने 40 करोड़ रुपये ऋण दिया था, जो आज ब्याज समेत 66 करोड़ के करीब बन चुका है।
बैंक ने लोन डिफॉल्टरों के लिए वन टाइम सैटलमेंट स्कीम भी पेश की थी। कई लोगों ने इसके तहत आवेदन भी किए, लेकिन उन्होंने भी मूलधन की रकम नहीं चुकाई। अब बैंक के सामने उनकी परिसंपत्तियों को कुर्क करने के सिवा दूसरा कोई रास्ता बचा नहीं है। लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत राजनेताओं के उन करीबियों के लिए है, जिन्होंने करोड़ों का लोन ले रखा है। उनकी संपत्तियों पर हाथ डालने से बैंक भी बच रहा है।