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December 19, 2025

हिमाचल में दिसंबर सूखा- बदल रहा बारिश-बर्फबारी का पैटर्न, नहीं सुधरे लोग तो होगी 'तबाही'

बर्फबारी ना होने से लोगों की अजीविका पर पड़ रहा आसर

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Shimla Tourism

शिमला। जिस हिमाचल की पहचान दिसंबर आते ही सफेद बर्फ, ठिठुरन और सैलानियों की रौनक से होती थी, वहां इस बार सर्दी सूनी नजर आ रही है। पहाड़ों पर न बर्फ की चादर है, न आसमान से गिरती सफेद फुहारें और न ही पर्यटकों की वही चहल-पहल। नए साल की बर्फबारी की उम्मीद लेकर शिमला पहुंचे सैलानी मायूस लौट रहे हैं, और उनके साथ ही टूट रही है उन लोगों की उम्मीद, जिनकी रोज़ी-रोटी पर्यटन से जुड़ी है। यह सिर्फ मौसम का बदला मिज़ाज नहीं, बल्कि हिमाचल की बदलती सर्दियों की एक चिंताजनक तस्वीर है।

बर्फबारी ना होने से लोगों की अजीविका पर पड़ रहा आसर 

बीते तीन वर्षों पर नजर डालें तो प्रदेश के पहाड़ काले दिखाई दे रहे हैं। दिसंबर महीने में बर्फबारी ना होने से लोग निराश हैं। इसका सीधा असर स्थानीय लोगों पर भी पड़ रहा है, जिनकी आजीविका पर्यटन पर निर्भर है। पर्यटकों की कमी के चलते होटल, टैक्सी, गाइड और छोटे कारोबारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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इन जिलों में हुई हल्की बर्फबारी 

दिसंबर महीने में अब तक दो से तीन बार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुए, लेकिन वे कमजोर रहे। इसी वजह से उनका असर सीमित रहा और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों लाहौल-स्पीति, चंबा, कांगड़ा और कुल्लू में ही कुछ स्थानों पर हल्की बर्फबारी देखने को मिली।

ग्लोबल वॉर्मिंग का बताया जा रहा है कारण

हिमालय नीति अभियान के अध्यक्ष कुलभूषण अभिमन्यु के अनुसार हिमाचल में सर्दियों की बर्फबारी पश्चिमी विक्षोभ से होती है, लेकिन ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण ये कमजोर पड़ रहे हैं। पहले 13 जनवरी से पहले गिरने वाली बर्फ लंबे समय तक टिकती थी और ग्लेशियरों को पानी देती थी, लेकिन अब बर्फ कम होने से ग्लेशियरों पर भी असर दिख रहा है।

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बर्फबारी न होने से पर्यटन पर पड़ रहा असर 

उधर, शिमला और आसपास के इलाकों में समय पर बर्फबारी न होने से पर्यटन और बागवानी से जुड़े लोगों को नुकसान हो रहा है। पर्यटक कम आ रहे हैं, जिससे होटल और टैक्सी कारोबार प्रभावित है। टैक्सी यूनियन का कहना है कि बर्फ न पड़ने से कुफरी, चायल और नारकंडा जैसे इलाकों के लिए काम लगभग बंद हो गया है और सर्दियों का सीजन पहले जैसा नहीं रहा।

 पिछले 10 सालों में घूमने आये पर्यटकों की संख्या 

⦁    2015: लगभग 1.75 करोड़ पर्यटक
⦁    2016: लगभग 1.84 करोड़ पर्यटक
⦁    2017: लगभग 1.96 करोड़ पर्यटक
⦁    2018: लगभग 1.64 करोड़ पर्यटक
⦁    2019: लगभग 1.72 करोड़ पर्यटक
⦁    2020 (कोविड): लगभग 32 लाख पर्यटक
⦁    2021: लगभग 56 लाख पर्यटक
⦁    2022: लगभग 1.51 करोड़ पर्यटक
⦁    2023: लगभग 1.60 करोड़ पर्यटक
⦁    2024: लगभग 1.81 करोड़ पर्यटक

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दिसंबर में बर्फ पड़ने से आते है टूरिस्ट

होटल कारोबारी अतुल गौतम का कहना है कि हिमाचल में सर्दियों का पर्यटन पूरी तरह बर्फबारी पर निर्भर रहता है। क्रिसमस और नए साल के दौरान 20 से 31 दिसंबर तक शिमला में आमतौर पर भारी भीड़ रहती है। अगर दिसंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में अच्छी बर्फबारी हो जाए तो पूरे महीने और जनवरी-फरवरी तक पर्यटक आते रहते हैं, जिससे होटल और अन्य कारोबार को फायदा होता है।

लंबे समय तक चलती है दिसंबर की बर्फ 

इसका असर बागवानी पर भी पड़ता है। बागवान संजीव चौहान के अनुसार दिसंबर में होने वाली अच्छी बर्फबारी लंबे समय तक टिकती है, जिससे सेब के लिए जरूरी चिलिंग आवर्स पूरे होते हैं। बर्फ के धीरे-धीरे पिघलने से बगीचों में नमी बनी रहती है, फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और ठंड के कारण कीट-पतंगों का प्रकोप भी कम रहता है।

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पिछले कुछ सालों में हुई बर्फबारी के आंकड़े

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के वरिष्ठ वैज्ञानिक संदीप कुमार शर्मा के अनुसार शिमला में दिसंबर की बर्फबारी आमतौर पर 20 दिसंबर के बाद होती है। ये है कुछ सालों के आंकड़े-

 

⦁    पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में दिसंबर माह में केवल 1 या 2 बार ही बर्फबारी के स्पेल दर्ज हुए हैं।
⦁    दिसंबर 2022, 2023 और 2024 में शिमला में कोई बर्फबारी नहीं हुई।
⦁    दिसंबर 2021 में सिर्फ हल्की बर्फबारी दर्ज की गई थी।
⦁    वर्ष 2014 में दिसंबर माह में 3 स्पेल बर्फबारी हुई, जिसमें कुल करीब 40 सेंटीमीटर बर्फ गिरी थी।
⦁    आमतौर पर शिमला और हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी की संभावना दिसंबर के तीसरे सप्ताह में अधिक रहती है।
⦁    कुछ वर्षों में दूसरे सप्ताह (12–13 दिसंबर) में भी बर्फबारी दर्ज की गई है।
⦁    वर्ष 2012 और 2018 में दिसंबर के दूसरे सप्ताह में बर्फबारी का एक स्पेल देखा गया था।
⦁    2010 से 2024 के बीच सबसे अधिक 38 सेंटीमीटर बर्फबारी रिकॉर्ड की गई है।
⦁    दिसंबर 2012 में दो स्पेल में 9 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई।
⦁    दिसंबर 2018 में दो स्पेल में 7.1 सेंटीमीटर बर्फ दर्ज की गई।
⦁    वर्ष 2019 में दिसंबर में करीब 20 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई।
⦁    2020–21 में दिसंबर माह के दौरान मात्र 1 सेंटीमीटर बर्फबारी रिकॉर्ड की गई।

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