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September 25, 2025

हिमाचल: सास के जाने का दुख नहीं सह पाई बहू, एक घंटे बाद त्यागे प्राण; एक साथ हुआ दोनों का संस्कार

सास की देह से लिपट कर रोते हुए बहू ने भी त्याग दिए प्राण

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Hamirpur News

हमीरपुर। जहां आमतौर पर सास.बहू के रिश्ते को घरेलू कलह और टकराव का प्रतीक माना जाता है, वहीं हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के जाहू गांव से एक ऐसी मार्मिक घटना सामने आई है, जिसने इस रिश्ते की परिभाषा ही बदल दी है। यहां सास की मौत के महज एक घंटे बाद उसकी बहू ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। यह दृश्य गांव के हर व्यक्ति की आंखों में आंसू छोड़ गया।

सास की मौत का सदमा सह न सकी बहू

जाहू गांव निवासी 85 वर्षीय दमोदरी देवी पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थीं। बुधवार शाम करीब 7 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। परिवार में शोक का माहौल छा गया। तभी उनकी बहू, रेशमा देवी पत्नी कश्मीर सिंह अपनी सास के शव से लिपटकर रो रही थी। इसी दौरान अचानक उसके रोने की आवाज बंद हो गई और वह बेसुध हो गई। परिजन उसे तुरंत ही अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

 

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ऐसा प्रेम, जो विरले ही देखने को मिलता है

स्थानीय लोगों के अनुसार सास और बहू के बीच बेहद आत्मीय संबंध थे। रेशमा न केवल सास की देखभाल करती थीं, बल्कि उन्हें अपनी मां की ही तरह सम्मान देती थी। दोनों की आपसी समझ और प्रेम पूरे गांव के लिए एक मिसाल थी। यही कारण है कि दमोदरी के निधन का सदमा रेशमा सह नहीं सकीं और उन्होंने भी प्राण त्याग दिए।

एक ही चिता पर अंतिम संस्कार

गुरुवार को गांव के श्मशानघाट पर जब दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया, तो वहां मौजूद हर आंख नम थी। यह दृश्य न केवल दुखद था, बल्कि रिश्तों की गहराई को दर्शाने वाला भी था। सैकड़ों ग्रामीण इस अंतिम विदाई में शामिल हुए और सास-बहू की इस अनुपम जोड़ी को अश्रुपूरित विदाई दी।

 

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पति कश्मीर सिंह पर टूटा दुखों का पहाड़

रेशमा के पति कश्मीर सिंह पहले से ही अस्वस्थ चल रहे हैं। मां और पत्नी दोनों के एक साथ चले जाने से वे पूरी तरह टूट चुके हैं। परिजनों के अनुसार वह इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं और अभी तक यह स्वीकार ही नहीं कर पा रहे कि यह सब कुछ उनके साथ घटित हुआ है।

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जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जताया शोक

स्थानीय विधायक सुरेश कुमार ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि यह घटना दर्शाती है कि रिश्ते केवल खून के नहीं, आत्मा के भी होते हैं। सास-बहू के रिश्ते की ऐसी मिसालें विरले ही देखने को मिलती हैं। गांव के अन्य प्रबुद्ध लोगों और जन प्रतिनिधियों ने भी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

 

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समाज के लिए एक संदेश

यह घटना केवल एक पारिवारिक शोक की कहानी नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक संदेश भी है कि सास और बहू का रिश्ता हमेशा टकराव और तनाव का नहीं होता। जहां समझ, सम्मान और प्रेम होता है, वहां यह रिश्ता मां-बेटी जैसा बन सकता है। जाहू गांव की दमोदरी और रेशमा की यह अनूठी जोड़ी हमें यही सिखाती है।

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