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January 14, 2026
हिमाचल : खाई में लुढ़की बस, मां ने खुद ढाल बनकर बचाया बच्चा- सीने से नहीं होने दिया अलग
त्योहार मनाने गांव जा रहे थे मां-बेटा, गहरी खाई में गिर गई बस
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के हरिपुरधार में 9 जनवरी को हुआ भीषण बस हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं था। वह दिन जिले के इतिहास में गहरे जख्म की तरह दर्ज हो गया। इस हादसे में कई परिवारों के चिराग बुझ गए और कई लोग जिंदगी व मौत के बीच जूझते नजर आए।
बस में सवार यात्रियों में शायद ही कोई ऐसा रहा हो, जो इस दुर्घटना के बाद बिना चोट के बाहर निकला हो। पहाड़ी सड़कों की भयावहता उस दिन अपनी चरम सीमा पर थी। लेकिन इसी मंजर के बीच एक ऐसी कहानी भी सामने आई, जिसने इंसानियत और ममता पर लोगों का विश्वास और मजबूत कर दिया।
इस दर्दनाक दुर्घटना में तीन साल का मासूम तेजस बिल्कुल सुरक्षित बाहर निकला। न उसके शरीर पर किसी प्रकार की चोट थी और न ही उसके चेहरे से मासूमियत का सुकून गायब हुआ। यह किसी साधारण संयोग का परिणाम नहीं था, बल्कि एक मां की अदम्य ममता, साहस और त्याग का जीवंत उदाहरण था।
कुफरी क्षेत्र का रहने वाला तेजस अपनी मां की गोद में बस चालक के ठीक पीछे वाली सीट पर बैठा था। मां-बेटा शिमला से अपने पैतृक गांव माघी पर्व मनाने जा रहे थे। बस पहाड़ी रास्तों पर सामान्य गति से आगे बढ़ रही थी। रास्ता संकरा था, मोड़ तीखे थे, लेकिन सफर सामान्य लग रहा था।
इसी दौरान अचानक बस को जोरदार झटका लगा। पलभर में संतुलन बिगड़ा और बस खाई की ओर झुक गई। यात्रियों को कुछ समझने का मौका भी नहीं मिला। जैसे ही खतरे का अंदेशा हुआ, मां ने एक सेकेंड भी नहीं गंवाया। उसने तेजस को पूरी ताकत से अपने सीने से लगा लिया।
उस पल वह सिर्फ एक मां नहीं रही, बल्कि अपने बच्चे के लिए जीवित सुरक्षा कवच बन गई। बस लगभग 200 फुट गहरी खाई में पलटती चली गई। लोहे के ढांचे के टकराने की आवाजें, टूटते शीशे और यात्रियों की चीख-पुकार चारों ओर गूंज रही थी। हर पल मौत सामने खड़ी थी।
इस पूरे भयावह सफर के दौरान मां ने अपने शरीर को बेटे के चारों ओर ढाल बनाकर रखा। हर झटका, हर चोट उसने खुद सहन की, ताकि मासूम तक आंच न पहुंचे। हादसे में मां को गंभीर चोटें आईं, लेकिन तेजस को खरोंच तक नहीं आई। डॉक्टरों के अनुसार, अगर मां ने उस क्षण अपने बेटे को ढाल की तरह न ढका होता, तो नतीजा बेहद दर्दनाक हो सकता था।
हादसे के बाद जब राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा, तो चारों तरफ दर्द और मातम का माहौल था। घायल यात्री मदद के लिए कराह रहे थे, वहीं कुछ लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। इसी बीच जब बचाव कर्मियों ने मां की गोद से तेजस को सुरक्षित बाहर निकाला, तो वहां मौजूद लोग खुद को भावुक होने से रोक नहीं पाए। मां खुद गंभीर रूप से घायल थी, लेकिन उसके चेहरे पर सिर्फ एक ही सुकून था- मेरा बच्चा सुरक्षित है।
फिलहाल तेजस पूरी तरह स्वस्थ है और सोलन के क्षेत्रीय अस्पताल में अपनी घायल मां के साथ भर्ती है। शिमला में कार्यरत तेजस के पिता भी अस्पताल पहुंच चुके हैं। परिवार इस कठिन समय में एक-दूसरे का हौसला बनकर खड़ा है।
हरिपुरधार का यह बस हादसा भले ही कई जिंदगियों के लिए त्रासदी बन गया हो, लेकिन तेजस और उसकी मां की कहानी यह सिखा जाती है कि मां की ममता से बड़ा कोई सुरक्षा कवच नहीं होता। न कोई सीट बेल्ट, न कोई तकनीक- जब बात बच्चे की सुरक्षा की आती है, तो मां खुद सबसे बड़ा चमत्कार बन जाती है।