#हिमाचल
January 14, 2026
हिमाचल पेंशन योजना में बड़ा घोटाला: 42 हजार मृत और अपात्र सालों से ले रहे थे पैसा, नपेंगे कई अफसर
42,867 मृत और अपात्र सालों से ले रहे थे पैसा
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शिमला। सरकारी कागज़ों में जिंदा, लेकिन हकीकत में दुनिया छोड़ चुके हजारों लोग और उनके नाम पर हर महीने सरकारी खजाने से निकलता रहा पैसा। हिमाचल प्रदेश की सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से जुड़ी जांच में ऐसी ही चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों तक जिन योजनाओं का उद्देश्य गरीब, बुजुर्ग और असहाय लोगों को सहारा देना था, उन्हीं योजनाओं में बड़े स्तर पर गड़बड़ी उजागर हुई है।
राज्य सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बताया गया कि एप आधारित ई-केवाईसी प्रक्रिया के दौरान सामाजिक सुरक्षा पेंशन डाटाबेस का मिलान किया गया। इस दौरान कुल 42,867 ऐसे लाभार्थी पाए गए, जो या तो मृत हैं या फिर योजनाओं के लिए अपात्र थे। इनमें 37,335 लोग मृत और 5,532 अपात्र श्रेणी में शामिल हैं। यह आंकड़ा इस बात की गवाही देता है कि लंबे समय से फील्ड स्तर पर सत्यापन व्यवस्था लगभग निष्क्रिय रही।
निदेशक (आईटी) ने बैठक में बताया कि वर्ष 2016 से अब तक सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम पोर्टल से 4,52,779 मृत्यु रिकॉर्ड प्राप्त किए गए हैं। इनमें से 1,35,473 रिकॉर्ड आधार संख्या से सीडेड पाए गए। सचिव वित्त, योजना, अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी डॉ. अभिषेक जैन ने निर्देश दिए कि इन सभी आधार-सीडेड रिकॉर्ड्स का तत्काल ई-केवाईसी आधारित पेंशन डाटाबेस से मिलान किया जाए, ताकि मृत लाभार्थियों को बिना देरी योजनाओं से हटाया जा सके।
बैठक में यह भी सामने आया कि सीआरएस डाटा के सत्यापन के बाद 2,378 लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से हटाया जा चुका है। ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य विभागों ने अभी और विवरण मांगे हैं, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है।
डॉ. अभिषेक जैन ने पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ डाटा सुधार का विषय नहीं है। जिन कर्मचारियों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण मृत और अपात्र लोग वर्षों तक पेंशन लेते रहे, उनकी जवाबदेही तय की जाएगी। फील्ड स्तर से लेकर जिला और निदेशालय स्तर तक की भूमिका की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
सचिव वित्त ने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं का पैसा केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचना चाहिए। भविष्य में ई-केवाईसी और सीआरएस आधारित सत्यापन को और सख्त किया जाएगा, ताकि इस तरह की गड़बड़ियों की कोई गुंजाइश न रहे। सरकार अब तकनीक के साथ-साथ फील्ड सत्यापन व्यवस्था को भी मजबूत करने की तैयारी में है।