#विविध
January 5, 2026
हिमाचल में रिपेयर होंगे जहाज, नए एयरपोर्ट निर्माण पर विचार; टैंकों के स्पेयर पार्ट्स का भी लगेगा उद्योग
हिमाचल में स्थापित होंगे बड़े उद्योग, उद्योगपतियों ने मांगी जमीन
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक परिदृश्य को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राजधानी शिमला के पीटरहॉफ में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के प्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का सीधा संवाद प्रदेश के औद्योगिक भविष्य के लिए अहम माना जा रहा है। इस संवाद में न केवल नए-नए उद्योग लगाने के प्रस्ताव सामने आए, बल्कि बड़े निवेश, आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे के विस्तार को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए कि आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश में बड़े उद्योगों की स्थापना होगी। इससे राज्य न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होगा, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। एमएसएमई प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन की मांग रखी और सरकार से प्रक्रियाओं को सरल बनाने का आग्रह किया।
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संवाद के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में पेट्रोल-डीजल से चलने वाली लगभग 22 हजार टैक्सी गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदला जाएगा। इसके लिए नई योजना लाई जा रही है, जिसके तहत 40 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी।
उद्योगपतियों ने ईवी चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि जब तक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं होगा] तब तक लोग बड़े पैमाने पर ईवी अपनाने से हिचकिचाएंगे। सरकार ने भरोसा दिलाया कि चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार पर तेजी से काम होगा। इसके साथ ही उद्योगों के लिए बिजली दरों में रियायत देने का भी आश्वासन दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली के एआरआर में कमी की गई है और इसका लाभ उद्योगों को मिलेगा।
एमएसएमई प्रतिनिधियों ने उद्योगों के लिए जमीन उपलब्ध कराने और धारा 118 के तहत प्रक्रिया को सरल करने की मांग की। उनका कहना था कि उद्योग लगाने, बंद होने या दोबारा लीज पर देने की स्थिति में बार-बार अनुमति लेना उद्योगपतियों के लिए बड़ी बाधा बन रहा है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि धारा 118 एक संवेदनशील विषय है और इसका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि कृषि भूमि की रक्षा करना है। फिर भी उद्योगों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इस पर पुनर्विचार किया जा रहा है और संबंधित विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया है।
संवाद में कई बड़े निवेश प्रस्ताव सामने आए। रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र से जुड़े निवेशकों ने नालागढ़ क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ जमीन की मांग रखी और हजारों करोड़ रुपये के निवेश का संकेत दिया। रोबोटिक्स, ड्रोन, टैंक और रक्षा उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स जैसे अत्याधुनिक उद्योगों की स्थापना की योजना से यह साफ है कि हिमाचल अब पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर हाईटेक सेक्टर की ओर कदम बढ़ा रहा है।
उद्योग प्रतिनिधियों ने हिमाचल में नए एयरपोर्ट निर्माण की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उनका कहना था कि बड़े उद्योगों और एयरोनॉटिकल सेक्टर के विकास के लिए नए एयरपोर्ट और तकनीकी संस्थानों की जरूरत होगी। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में अंडरग्राउंड बंकर पार्किंग जैसे आधुनिक समाधान सुझाए गए, जिससे शहरी क्षेत्रों में पार्किंग की समस्या का स्थायी हल निकाला जा सके।