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January 5, 2026
खुशखबरी ! हिमाचल में होगी नौकरियों की बारिश : 10 हजार करोड़ का निवेश करने जा रही सरकार
हिमाचल के किसानों-बागवानों को सीधा लाभ मिलने की भी उम्मीद
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलने वाली है। देश-विदेश की 37 नामी कंपनियों ने राज्य में करीब 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश के लिए राज्य सरकार के साथ मेमोरेंडम ऑफ कमिटमेंट (MoC) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह करार रविवार को राजधानी शिमला के पीटरहॉफ में आयोजित हिम MSME फेस्ट के दौरान हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने की, जबकि उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान विशेष रूप से मौजूद रहे।
हिमाचल प्रदेश के लिए यह आयोजन इसलिए भी खास रहा क्योंकि फार्मा और डिफेंस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भारी निवेश का भरोसा मिला है। कार्यक्रम में 11 फार्मा कंपनियों ने प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए 4,263 करोड़ रुपये के निवेश के एमओसी साइन किए।
वहीं, 7 डिफेंस कंपनियों ने 2,750 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर करार किया है। डिफेंस सेक्टर में आने वाली कंपनियां हिमाचल में रक्षा उपकरण, तोप के गोले, टैंक के कलपुर्जे, विमान रिसाइकलिंग, हथियार, ड्रोन और अन्य अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों का निर्माण करेंगी। इससे न सिर्फ प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि हिमाचल की पहचान रक्षा उत्पादन से जुड़े राज्य के रूप में भी मजबूत होगी।
डिजिटल इंडिया की दिशा में हिमाचल प्रदेश भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस कड़ी में डाटा सेंटर सेक्टर में 700 करोड़ रुपये के निवेश के लिए 2 MOC साइन किए गए। ये कंपनियां डाटा सेंटर सेवाएं, IT समाधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वचालित कोड जनरेशन और आधुनिक तकनीकी सेवाओं के क्षेत्र में काम करेंगी।
प्रदेश सरकार के ग्रीन मोबिलिटी क्षेत्र की कंपनियों ने भी निवेश में रुचि दिखाई है। इन कंपनियों द्वारा इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन, EV चार्जिंग नेटवर्क, एयर मोबिलिटी और डेटा सेंटर से जुड़ी संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। ग्रीन मोबिलिटी क्षेत्र में 300 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव आया है।
फूड प्रोसेसिंग कंपनियों ने खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और वितरण के क्षेत्र में निवेश की हामी भरी है, जिससे हिमाचल के किसानों और बागवानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं, मोनोवर्ड ग्रुप ने प्रदेश में पांच सितारा होटल स्थापित करने के लिए करीब 2,000 एकड़ भूमि की मांग की है।
यही ग्रुप हिमाचल में रिसाइकलिंग प्लांट भी स्थापित करेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण और रोजगार-दोनों को बढ़ावा मिलेगा। रिसाइकलिंग सेक्टर में 1,508 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव सामने आया है। इसके अलावा होटल व्यवसाय, नवीकरणीय ऊर्जा, मेटल एंड एलॉय और स्टील सेक्टर से जुड़ी कंपनियों ने भी निवेश के MOC साइन किए हैं।
इस आयोजन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हिमाचल को पहचान मिली। रूस से आई फार्मा कंपनी ‘आईलया’ ने प्रदेश में फार्मा उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। यह हिमाचल के लिए विदेशी निवेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
MOC साइन करने के साथ-साथ उद्योगपतियों ने प्रदेश सरकार के समक्ष अपनी कुछ प्रमुख मांगें भी रखीं। उद्योगपतियों ने सस्ती बिजली, नीतिगत स्थिरता और धारा-118 के सरलीकरण की मांग उठाई। उनका कहना था कि अगर जमीन से जुड़े नियमों को सरल किया जाए और बिजली दरें प्रतिस्पर्धी हों, तो हिमाचल निवेश के लिए और भी आकर्षक बन सकता है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार उद्योग-अनुकूल वातावरण बनाने के लिए उचित कदम उठा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि निवेशकों की वास्तविक समस्याओं का समाधान किया जाएगा और हिमाचल को रोजगार, पर्यावरण और आर्थिक संतुलन के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
सेक्टर MOC निवेश (₹ करोड़)
हिम MSME फेस्ट में हुए ये करार साफ संकेत देते हैं कि हिमाचल प्रदेश अब सिर्फ पर्यटन और बागवानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फार्मा, डिफेंस, ग्रीन टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में भी निवेश का नया केंद्र बनता जा रहा है। यह निवेश आने वाले वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभाएगा।