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August 13, 2025
हिमाचल का जवान देश के लिए शहीद- आज पैतृक गांव पहुंचेगी देह, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
मुख्यमंत्री सुखविंद सिंह सुक्खू ने जताया गहरा शोक
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ऊना। हिमाचल प्रदेश ने अब तक सैकड़ों बेटे देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर चुके हैं। वीरभूमि कहलाए जाने वाले हिमाचल के ऊना जिले का अब एक और बेटा देश के लिए शहीद हो गया है।
जिले के कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र में मातम का माहौल है। भारतीय सेना के बहादुर जवान हवलदार अरुण कुमार ‘लक्की’ ने देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे दिया। जैसे ही उनकी शहादत की खबर गांव तक पहुंची, पूरे क्षेत्र में गम की लहर दौड़ गई।
हर कोई उन्हें एक निडर, कर्तव्यनिष्ठ और मिलनसार इंसान के रूप में याद कर रहा है, जिनका जीवन पूरी तरह मातृभूमि की रक्षा को समर्पित था। अरुण कुमार भारतीय सेना में लंबे समय से अपनी बहादुरी और अनुशासन के लिए पहचाने जाते थे।
अपने कार्यक्षेत्र में वे हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े रहकर जिम्मेदारियां निभाते थे। कर्तव्यपालन के दौरान उन्होंने जो बलिदान दिया, वह न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे हिमाचल और देश के लिए गर्व और दर्द का मिश्रण बन गया है।
शहीद का पार्थिव शरीर सेना के दस्ते के साथ उनके पैतृक गांव लाया जाएगा। यहां पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। सेना और प्रशासन के उच्च अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पुलिस बल और हजारों की संख्या में स्थानीय लोग इस अंतिम यात्रा में शामिल होंगे। गांव में तिरंगे और काली पट्टियों के साथ लोग उन्हें अंतिम विदाई देने की तैयारी कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सेना में हवलदार एवं कुटलैहड़ निवासी श्री अरुण कुमार ‘लक्की’ जी का कर्तव्य पालन के दौरान निधन अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है। यह राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी देश सेवा, साहस और समर्पण को सदैव याद रखा जाएगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और परिवार को यह गहन दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
जहां एक ओर परिजन और ग्रामीण उनकी असमय जुदाई से गहरे सदमे में हैं, वहीं दूसरी ओर उनके साहस पर गर्व भी महसूस कर रहे हैं। घर के बाहर और गलियों में लोग गमगीन चेहरों के साथ जुटे हुए हैं। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं आंखों में आंसू लिए बस यही कह रही हैं- “लक्की ने अपनी मिट्टी का मान बढ़ा दिया।”
गांव के लोग बताते हैं कि अरुण कुमार हमेशा युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करते थे। छुट्टियों में आते तो बच्चों को खेलों में भाग लेने, अनुशासन और देशभक्ति की कहानियां सुनाते। उनकी मुस्कान और जिंदादिली अब सिर्फ यादों में रह जाएगी, लेकिन उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।