#विविध
June 30, 2026
हिमाचल: 18 साल की देश सेवा, अब तिरंगे में घर लौटा जवान- पीछे छूट गई पत्नी और 2 मासूम बच्चे
सेना से जुड़ा रहा पूरा परिवार
शेयर करें:

ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के मलांगड़ मियां गांव निवासी भारतीय सेना के हवलदार विशम्बर सिंह की पार्थिव देह देहरादून से उनके पैतृक गांव पहुंच गई है। जैसे ही सेना के जवान ताबूत में उनकी पार्थिव देह लेकर घर पहुंचे, माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया।
बेटे की मौत की खबर से पहले ही टूट चुके परिवार पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब मां शीला देवी और पत्नी सोनिया देवी ने ताबूत देखा। दोनों खुद को संभाल नहीं पाईं और ताबूत से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं।
विशम्बर सिंह के माता-पिता, पत्नी और दोनों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे हैं। गांव में हर तरफ मातम पसरा हुआ है और लोग अपने वीर जवान को आखिरी विदाई देने के लिए पहुंच रहे हैं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: अचानक फेल हुई बस की ब्रेक, खाई देख सहमे यात्री- हड़बड़ी में चालक ने उठाया ये कदम
हवलदार विशम्बर सिंह की पार्थिव देह को फिलहाल उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। जैसे ही लोगों को उनके गांव पहुंचने की जानकारी मिली, बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और आसपास के क्षेत्र के लोग श्रद्धांजलि देने पहुंच गए। हर कोई नम आंखों से अपने गांव के वीर जवान को याद कर रहा है।
शहीद को नम आंखों से दी अंतिम विदाई
कुछ समय बाद गांव के ही श्मशान घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस दौरान सेना के जवान उन्हें अंतिम सलामी देंगे। पूरा क्षेत्र "भारत माता की जय" और "विशम्बर सिंह अमर रहे" के नारों से गूंज उठा है।
हवलदार विशम्बर सिंह ने साल 2008 में भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट ज्वाइन की थी। भर्ती होने के बाद उन्होंने करीब 18 साल तक देश की सेवा की। अपने कर्तव्य और जिम्मेदारी को हमेशा सबसे ऊपर रखने वाले विशम्बर सिंह अपने साथियों के बीच भी काफी सम्मान रखते थे।
यह भी पढ़ें : हिमाचल के 9 जिलों में मौसम का यलो अलर्ट : तेज आंधी-तूफान के साथ जमकर बरसेंगे बादल
जानकारी के अनुसार 35 वर्षीय विशंबर सिंह वर्तमान में देहरादून में भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में तैनात थे। सोमवार सुबह नियमित शारीरिक प्रशिक्षण (पीटी) के बाद उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: नशे में चूर व्यक्ति ने पति-पत्नी पर किया ह*मला, पहले कहे अपशब्द- फिर कमरे में किया बंद
साथी जवान उन्हें तुरंत सेना अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान उन्हें दोबारा हृदयाघात आया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। जवान की असामयिक मृत्यु की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, जबकि पूरे कुटलैहड़ क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
परिजनों के मुताबिक विशंबर सिंह करीब 25 दिन पहले छुट्टी पर अपने पैतृक गांव मलांगड़ आए थे। उन्होंने परिवार के साथ समय बिताया और फिर वापस ड्यूटी पर लौट गए। किसी ने भी नहीं सोचा था कि घर से विदा होते समय परिवार के साथ उनकी यह आखिरी मुलाकात होगी। अब गांव में हर व्यक्ति यही कह रहा है कि कुछ दिन पहले तक जो जवान परिवार के साथ हंसता-बोलता नजर आ रहा था, आज उसकी यादें ही शेष रह गई हैं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: 8 दिन से लापता 25 वर्षीय युवती की डैम में तैरती मिली देह, परिजनों की टूटी उम्मीद
विशंबर सिंह अपने पीछे माता-पिता पत्नी और दो बेटे छोड़ गए हैं। उनके पिता रसीला राम भी सेना से सेवानिवृत्त हैं। बेटे के निधन की खबर मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। माता शीला देवी और पत्नी सोनिया देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।
विशंबर सिंह अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बेटों को छोड़ गए हैं। बड़ा बेटा 10 वर्ष का है, जबकि छोटा बेटा अभी केवल 6 महीने का है। छह महीने पहले ही परिवार में दूसरे बेटे के जन्म की खुशियां आई थीं, लेकिन अब वही मासूम अपने पिता के साये से वंचित हो गया है। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि बच्चों की परवरिश और भविष्य को लेकर अब परिवार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में मानसून से पहले तबाही: जाहलमा नाले में आई भीषण बाढ़, पुलिया बही; सैकड़ों पर्यटक फंसे
विशंबर सिंह के पिता रसीला राम भी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। परिवार की कई पीढ़ियां देश सेवा से जुड़ी रही हैं। यही कारण है कि गांव के लोग इस परिवार को राष्ट्रभक्ति की मिसाल मानते हैं। लेकिन लगातार दूसरी बार बेटे को खोने का दर्द इस परिवार के लिए असहनीय बन गया है। परिजन और रिश्तेदार अभी भी इस घटना पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं।