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June 29, 2026
हिमाचल में मानसून से पहले तबाही: जाहलमा नाले में आई भीषण बाढ़, पुलिया बही; सैकड़ों पर्यटक फंसे
मानसून की दस्तक से पहले ही हिमाचल में बारिश का कहर
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केलंग (लाहुल-स्पीति)। हिमाचल प्रदेश में मानसून की औपचारिक दस्तक से पहले ही मौसम ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। सोमवार को प्रदेश के कई जिलों में हुई भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया, वहीं जनजातीय जिला लाहुल-स्पीति में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। लाहुल घाटी के जाहलमा नाले में आए उफान ने देखते ही देखते एक अस्थायी पुलिया को अपने साथ बहा लिया, जिससे क्षेत्र के कई गांवों का संपर्क कट गया और सैकड़ों लोग रास्तों में फंस गए।
जानकारी के अनुसार सोमवार दोपहर बाद जाहलमा नाले में अचानक पानी का बहाव कई गुना बढ़ गया। बर्फ पिघलने और ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश के कारण नाले में भारी मात्रा में पानी और मलबा आ गया। तेज बहाव के आगे अस्थायी पुलिया ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई और कुछ ही समय में बह गई। पुलिया के बहते ही सड़क मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। इसके चलते नाले के दोनों ओर सैकड़ों वाहन फंस गए। इनमें बड़ी संख्या में पर्यटक भी शामिल हैं, जो लाहुल और पांगी घाटी की ओर यात्रा कर रहे थे। सड़क बंद होने से लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा।
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बाढ़ के कारण लाहुल की 14 पंचायतों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट गया है। इसके अलावा चंबा जिले की पांगी घाटी का मनाली और केलंग की ओर से सड़क संपर्क भी प्रभावित हो गया है। स्थानीय लोगों को दैनिक जरूरतों और आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मार्ग बंद होने से जम्मू की ओर जाने वाले वाहन भी प्रभावित हुए हैं और कई जगहों पर लंबी कतारें लग गई हैं।
जाहलमा नाले में आई बाढ़ केवल पुलिया बहाकर ही नहीं रुकी, बल्कि अपने साथ लाए भारी मलबे ने चंद्रभागा नदी के बहाव को भी प्रभावित कर दिया। बताया जा रहा है कि बड़ी मात्रा में आया मलबा नदी के किनारे जमा हो गया, जिससे पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि जोबरंग पुल के आसपास जलस्तर तेजी से बढ़ गया और पुल का एक हिस्सा पानी में डूब गया। इसके चलते जोबरंग, रापे और राशेल गांवों का संपर्क भी प्रभावित हो गया है।
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अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ सैकड़ों पर्यटकों को भी मुश्किल में डाल दिया है। सड़क बंद होने के कारण कई लोग घंटों से रास्तों में फंसे हुए हैं। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मौसम में जाहलमा नाले में पानी बढ़ना सामान्य बात है, लेकिन इस बार पानी और मलबे का स्तर बेहद ज्यादा था, जिसने भारी नुकसान पहुंचाया।
बाढ़ का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है। जाहलमा पंचायत के ग्रामीणों के अनुसार खेतों तक पानी पहुंचाने वाली कई कूल्हें और सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। सिंचाई पाइप और अन्य ढांचे भी बाढ़ के साथ बह गए हैं। किसानों का कहना है कि फसलों के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं नष्ट हो जाने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन और सरकार से जल्द राहत और पुनर्स्थापना कार्य शुरू करने की मांग की है।
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गौरतलब है कि मई महीने में भी भारी मलबा और चट्टानें गिरने के कारण जाहलमा क्षेत्र का मुख्य पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद लोगों की सुविधा के लिए अस्थायी पुलिया तैयार की गई थी, लेकिन सोमवार को आई बाढ़ में वह भी बह गई। वर्तमान में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा नए स्थायी पुल का निर्माण कार्य जारी है, जिसके जुलाई के अंत तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
लाहुल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में जल्द राहत कार्य शुरू किए जाएंगे और अस्थायी पुलिया का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बीआरओ द्वारा स्थायी पुल निर्माण का कार्य भी युद्धस्तर पर जारी है और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
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मानसून की शुरुआत से पहले ही लाहुल घाटी में आई इस बाढ़ ने प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में बारिश का दौर जारी रहा तो पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, बाढ़ और सड़क अवरोध जैसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। ऐसे में संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।