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January 29, 2026
हिमाचल में अब पासिंग से पहले मशीनें जांचेंगी वाहनों की सेहत, MVI के चक्करों से मिलेगा छुटकारा
कहां शुरू होगा पहला ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन ?
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में नए साल के साथ-साथ गाड़ी वाले लोगों के लिए एक खास और नया बदलाव लेकर आया है। अब गाड़ी की फिटनेस या पासिंग कराने के लिए MVI यानी मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रदेश सरकार ने इसे पारदर्शी बनाने और इंसानों के हस्तक्षेप को खत्म करने के लिए ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन (ATS) शुरू करने का निर्णय लिया है।
बता दें कि, प्रदेश सरकार ने इस नई व्यवस्था में गाड़ियों की फिटनेस पूरी तरह मशीन और आधुनिक तकनीक से जांची जाएगी। यानी इंस्पेक्टर पर भरोसा करना अब जरूरी नहीं रहेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावना पर भी लगाम लगेगा।
इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है। पहला ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन कांगड़ा सब डिविजन के रानीताल में 1 फरवरी से चालू होगा। शुरुआत में यहाँ कमर्शियल वाहनों जैसे ट्रक, बस और टैक्सी की पासिंग की जाएगी।
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परिवहन विभाग के निदेशक नीरज कुमार ने बताया कि यह व्यवस्था वाहन मालिकों के लिए बहुत आसान और सुविधाजनक होगी। उनका कहना है कि हिमाचल में अब हर वाहन की फिटनेस तेज़, निष्पक्ष और समान रूप से मशीनों के जरिए जांची जाएगी।
पहली बार हिमाचल में किसी ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन पर गाड़ियों की पासिंग पूरी तरह मशीनों से होगी। यहाँ ब्रेक, हेडलाइट, सस्पेंशन, प्रदूषण और अन्य तकनीकी मानकों की जांच स्वचालित तरीके से होगी। इससे हर वाहन की जाँच एक जैसी होगी और कोई इंस्पेक्टर पक्षपाती नहीं होगा।
पहले हिमाचल में गाड़ियों की पासिंग मैन्युअल होती थी। सब डिविजन स्तर पर MVI अलग-अलग तारीखें तय करते थे। अगर वाहन मालिक तय दिन पर पासिंग नहीं कर पाते, तो अगली तारीख तक लंबा इंतजार करना पड़ता था। इससे लोगों को काफी परेशानी होती थी।
लेकिन अब ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर खुलने के बाद वाहन मालिक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी दिन गाड़ी पास करवा सकते हैं। इससे समय की बचत होगी और प्रक्रिया तेज और भरोसेमंद होगी।
प्रदेश सरकार की योजना है कि हर जिले में ATS खोला जाए। इसके बाद डिवीजन स्तर पर भी नए ऑटोमेटिक सेंटर खोले जा सकते हैं। परिवहन विभाग ने इसके लिए आवेदन का विकल्प भी खोल रखा है। इस बदलाव से हिमाचल की वाहन पासिंग प्रणाली आधुनिक, डिजिटल और पारदर्शी बन जाएगी। साथ ही आने वाले समय में पूरा प्रदेश इस नई तकनीक का लाभ ले पाएगा।