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April 2, 2026

हिमाचल में स्मार्ट मीटर 'टेंशन' खत्म... जबरन नहीं लगेगा, जब मर्जी हटा भी सकेंगे; क्या बोले केंद्रीय मंत्री

भारी बिलों के बाद बड़े विवाद पर केंद्र सरकार ने लिया यू टर्न

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Smart Electricity Meter India

नई दिल्ली/शिमला। हिमाचल प्रदेश सहित देशभर में स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर मचे घमासान और जनता के भारी विरोध के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा कदम उठाया है। हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में स्मार्ट मीटर के खिलाफ सड़कों पर उतरे उपभोक्ताओं की आवाज आखिरकार दिल्ली तक पहुंच गई है। केंद्र सरकार ने अब साफ कर दिया है कि स्मार्ट मीटर लगाना कोई मजबूरी नहीं बल्कि एक विकल्प होगा। यानी अब बिजली विभाग किसी भी उपभोक्ता की छत पर उसकी मर्जी के बिना जबरन स्मार्ट मीटर नहीं टांग सकेगा।

भारी बिलों से सड़कों पर उतरे थे लोग

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं के पैरों तले जमीन खिसक गई थी। लोगों की शिकायत थी कि जैसे ही स्मार्ट मीटर लगे, उनके बिजली के बिल दो से तीन गुना तक बढ़ गए। शिमला से लेकर धर्मशाला तक स्मार्ट मीटर में आ रहे भारी भरकम बिलों के चलते लोग सड़कों पर उतर आए। रैलियों और प्रदर्शनों के जरिए लोगों ने सरकार पर भारी दबाव बनाया।

 

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लोकसभा में बोले ऊर्जा मंत्री

इस बात का खुलासा लोकसभा में विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने गुरुवार को किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं, बल्कि पूरी तरह वैकल्पिक व्यवस्था है। केंद्रीय ऊर्जा ने कहा कि कोई भी उपभोक्ता अगर स्मार्ट मीटर नहीं लगवाना चाहता, तो उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला जाएगा।

 

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मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि जो उपभोक्ता इस नई तकनीक का लाभ लेना चाहता है, केवल उसी के घर यह सुविधा दी जाएगी। उन्होंने उन खबरों का भी खंडन किया जिनमें कहा जा रहा था कि विभाग जबरन पुराने मीटर बदलकर स्मार्ट मीटर लगा रहा है।

लगाने के बाद हटा की भी मिलेगी सुविधा

सरकार ने उपभोक्ताओं को सबसे बड़ी राहत यह दी है कि अब मीटर लगवाने के बाद उसे हटाने का रास्ता भी खुला रहेगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यदि कोई उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगवाता है और बाद में उसे यह व्यवस्था पसंद नहीं आती, तो वह उसे हटवा भी सकता है। इसके लिए जमा की गई सिक्योरिटी राशि भी उपभोक्ता को वापस कर दी जाएगी। सरकार ने साफ किया कि स्मार्ट व्यवस्था केवल सुविधा के लिए है, किसी को परेशान करने के लिए नहीं।

 

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डिफॉल्टरों पर रहेगी सख्ती

हालांकिए सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जो उपभोक्ता लंबे समय से बिजली के बिल नहीं भर रहे हैं और जानबूझकर डिफॉल्टर बने हुए हैं, उनके लिए यह व्यवस्था कड़ी की जा सकती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई राज्यों में बिजली कंपनियां भारी घाटे में हैं क्योंकि लोग बिल न भरना स्वाभिमान की बात समझते हैं। ऐसे क्षेत्रों में बिजली चोरी रोकने के लिए प्रीपेड सिस्टम कारगर साबित हुआ है। जहां स्मार्ट मीटर लगे हैं, वहां कंपनियों का घाटा कम हुआ है और बिजली की सप्लाई में सुधार आया है।

 

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बिजली चोरी पर डिजिटल प्रहार

भले ही आम जनता के लिए इसे वैकल्पिक कर दिया गया हो, लेकिन बिजली चोरी रोकने के मिशन पर सरकार पीछे नहीं हटेगी। ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि सरकार बिजली की बर्बादी और चोरी को रोकने के लिए हर संभव तकनीकी उपाय करेगी। लेकिन इस प्रक्रिया में आम और ईमानदार उपभोक्ता को किसी भी तरह से प्रताड़ित नहीं होने दिया जाएगा। हिमाचल जैसे राज्य में, जहां भौगोलिक परिस्थितियां कठिन हैं, वहां सरकार के इस फैसले को बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

 

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