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December 9, 2025

हिमाचल की इस अनपढ़ महिला ने हिला दिया था पूरा सिस्टम, पहाड़ बचाने के लिए लड़ी लंबी लड़ाई

विधवा होने के बाद स्वीपर बन किया गुजारा

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Kinkri Devi Sirmaur

सिरमौर। टीवी, न्यूज और सोशल मीडिया- इन तीनों मंचों पर एक मुद्दा बार-बार सुनने को मिलता है। ये मुद्दा है- पर्यावरण - जिसे हम हर रोज अंधेरे की ओर धकेल रहे हैं। इस मुद्दे पर चिंतन जरूरी है लेकिन हिमाचल की किंकरी ने इसकी नीव कई सालों पहले ही रख दी थी।

बचपन से लोगों के घरों में किया काम

सिरमौर की किंकरी देवी एक गरीब परिवार में जन्मीं थीं, उनके पिता किसान थे, ऐसे में उन्होंने बचपन में ही लोगों के घर में कम करना शुरू कर दिया था। 14 साल की उम्र में ही उनकी शादी श्यामू नाम के बंधुआ मजदूर से कर दी गई थी। 

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रोजी चलाने के लिए बन गईं थीं स्वीपर

22 की उम्र में वो विधवा हो गईं जिसके बाद उन्होंने अपनी रोजी-रोटी लिए स्वीपर का काम करना शुरू कर किया। संघर्षों भरी जिंदगी के बावजूद वो पर्यावरण के लिए खड़ी हुईं और अनपढ़ होने के बावजूद उनकी आवाज गली, मोहल्लों, गांवों, शहरों, प्रदेश और देश होते हुए विदेश तक जा पहुंची। 

पानी होने लगा दूषित, जमीन हुई खराब

बात साल 1985 की है जब दून घाटी में उत्खनन पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद चूना पत्थर के उत्खनन ने सिरमौर जिले में पांव पसारे। बड़ी मात्रा में उत्खनन होने के चलते जिले के जलाशयों का पानी दूषित होने लगा, खेती की जमीन खराब होने लगी और जंगल भी कम होते गए।

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उत्खनन के खिलाफ कोर्ट में डाली PIL

ऐसे में अनपढ़ किंकरी देवी उत्खनन के विरोध में उतरी आवाज बनीं। इतना ही नहीं वे लोगों को प्रदूषण के खिलाफ जागरूक भी करने लगीं। उनकी लड़ाई की शुरूआत 1987 से हुई जब उन्होंने एक स्वयं सेवी संस्था पीप्लस एक्शन फॉर पीपल इन नीड की मदद से शिमला हाई कोर्ट में PIL फाइल की।

हाई कोर्ट पहुंच शुरू की भूख हड़ताल

ये मामला इलाके के 48 खदान के मालिकों के खिलाफ था जो चूनापत्थर के उत्खनन के लिए जिम्मेदार थे। जब PIL पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो किंकरी देवी खुद शिमला पहुंचीं और कोर्ट के आगे भूख हड़ताल पर बैठ गईं। 

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पहाड़ों पर विस्फोट पर लगा प्रतिबंध 

19 दिन की भूख हड़ताल के बाद फैसला किंकरी देवी के पक्ष में आया और कोर्ट ने उत्खनन और पहाड़ों पर विस्फोट करने पर प्रतिबंध लगा दिया। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को दोबारा खुलवाया गया लेकिन यहां भी फैसला किंकरी देवी के पक्ष में आया।

हिलेरी क्लिंटन ने ने दिया था सम्मान

किंकरी देवी को देश-विदेश दोनों जगहों पर सम्मानित किया गया। उन्हें एक प्रख्यात पर्यावरण रक्षक के रूप में पहचान मिली। 1995 में वे बीजिंग के अंतर्राष्ट्रीय महिला सम्मेलन में बुलाई गईं जहां हिलेरी क्लिंटन ने उन्हीं के हाथों उद्घाटन का दीप प्रज्वलित करवाया। 1999 में उन्हें 'झांसी की रानी लक्ष्मी बाई स्त्री शक्ति पुरस्कार' का सम्मान मिला।

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