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January 8, 2026

रिटायर्ड अफसरों को दोबारा नौकरी पर रखेगी सुक्खू सरकार- 70 हजार देगी सैलेरी, बेरोजगार नाराज

सरकार का तर्क- लंबित फाइलें निपटेंगी, मौजूदा अफसरों का बोझ घटेगा

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Revenue Department Himachal

शिमला। हिमाचल प्रदेश में जमीन, इंतकाल और राजस्व से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए सरकार ने एक नया रास्ता निकाला है। सालों से फाइलों में दबे मामलों और तहसीलों के चक्कर काट रहे लोगों की परेशानी को दूर करने के लिए सरकार द्वारा राजस्व विभाग में रिटायर्ड अफसरों की दोबारा एंट्री करवाई जाएगी। जिसे लेकर अधिकारिक सूचना भी जारी कर दी गई है। हालांकि बेरोजगार इस फैसले से नाराज नजर आ रहे हैं। 

सालों से लटके मामलों पर सरकार का फोकस

प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे राजस्व मामले हैं, जिनमें वर्षों से कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया। इंतकाल, जमीन के विवाद, रिकॉर्ड दुरुस्ती जैसे मामलों में देरी आम बात बन चुकी है। हाल ही में उपायुक्त स्तर पर हुई बैठकों में भी यह सामने आया कि लंबित केस आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुके हैं। इसी के बाद सरकार ने रिटायर्ड अधिकारियों को दोबारा सेवा में लेने का निर्णय लिया।

 

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जल्द शुरू होगी प्रक्रिया

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी जिलों के उपायुक्तों को आदेश जारी कर दिए हैं। अब डीसी अपने-अपने जिलों में जरूरत के अनुसार रिटायर्ड तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो और पटवारियों की पुनर्नियुक्ति कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि अनुभव का फायदा मिलेगा और काम की रफ्तार तेज होगी।

 

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सरकार का तर्क- मौजूदा अफसरों का बोझ घटेगा

सरकार के मुताबिक इस व्यवस्था से दोहरे फायदे होंगे। एक तरफ पुराने और जटिल मामलों को निपटाने में तेजी आएगी, दूसरी ओर मौजूदा अधिकारियों पर काम का दबाव भी कम होगा। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां लोग सालों से इंतकाल और जमीन संबंधी मामलों में भटक रहे हैं, वहां इस फैसले से सीधी राहत मिलने की उम्मीद है।

इतनी मिलेगी सैलरी

• तहसीलदार – ₹70,000 प्रति माह
• नायब तहसीलदार – ₹60,000 प्रति माह
• कानूनगो – ₹50,000 प्रति माह
• पटवारी – ₹40,000 प्रति माह

 

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प्रदेश के बेरोजगार नाराज

राज्य सरकार का कहना है कि यह फैसला सिर्फ अस्थायी व्यवस्था नहीं, बल्कि राजस्व सिस्टम को पटरी पर लाने की कोशिश है। वहीं, बेरोजगारों का कहना है कि लंबे समय से लंबित पड़े पटवारी के पदों को जल्द भरा जाए, यदि काम का बोझ है तो उसके लिए स्थायी रोजगार का रास्ता खोजे ना कि रिटायर अधिकारियों को फिर से नौकरी पर रखा जाए। 

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