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November 7, 2025

हिमाचल: ये कैसा न्याय ? फौजी की पत्नी को 65 साल बाद मिला पेंशन का हक

1965 के युद्ध में घायल हुए थे फौजी पति

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Himachal News

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की रहने वाली मिन्नी देवी उर्फ मुन्नी ने 6 दशकों तक कोर्ट के चक्कर काटे। तब जाकर उन्हें न्याय मिला लेकिन वो न्याय जो 60-65 साल बाद मिला हो, क्या वो सच में न्याय है ? आइए जानते है मिन्नी की पूरी कहानी।

1965 के युद्ध में लगी गंभीर चोटें

मंडी जिले के दिवंगत सैनिक चंदरमणि 8 अप्रैल 1964 को सेना में भर्ती हुए थे और साल 1965 में युद्ध में हिस्सा लिया था। युद्ध के दौरान उन्हें गंभीर शारीरिक व मानसिक चोटें आईं जिनका इलाज लखनऊ के मिल्ट्री अस्पताल में हुआ लेकिन उन्हें ड्यूटी के योग्य नहीं माना गया।

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1987 में हो गया फौजी का देहांत

सेवा की आवश्यकता नहीं होने की बात कहकर 21 सितंबर 1968 को उन्हें दो सैनिकों की मदद से घर भेज दिया गया। 24 मार्च 1987 को उनका देहांत हो गया। फिर सैनिक पत्नी ने विशेष पारिवारिक पेंशन का दावा किया।

दी गई साधारण पारिवारिक पेंशन

14 जुलाई साल 2023 को इस दावे पर सशस्त्र बल अधिकरण चंडीगढ़ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। अधिकरण ने उन्हें साधारण पारिवारिक पेंशन देने का आदेश दिया था। इस फैसले के खिलाफ केंद्र की सरकार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की थी।

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युद्ध में घायल होने से हुई थी छुट्टी

केंद्र सरकार ने मिन्नी देवी का दावा काफी देर से किए जाने के तर्क के साथ फैसले को चुनौती दी क्योंकि सैनिक की मौत 1987 में हुई थी। इस केस को लेकर हाईकोर्ट ने कहा कि ये साफ है कि सेवा से सैनिक की छुट्टी 1965 के युद्ध में लगी चोटों के कारण हुई। 

विशेष पारिवारिक पेंशन के हकदार

नतीजतन उसे विकलांगता पेंशन मिलनी चाहिए थी। मौत के बाद सैनिक की पत्नी को विशेष पारिवारिक पेंशन का अधिकार था। अदालत ने ये भी स्पष्ट किया कि सशस्त्र बल अधिकरण को साधारण पारिवारिक पेंशन नहीं, बल्कि विशेष पारिवारिक पेंशन देनी चाहिए थी, क्योंकि सैनिक युद्ध में लगी शारीरिक और मानसिक चोटों के कारण अक्षम हो गया था।

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6 दशकों बाद मिला पेंशन का हक

मंडी जिले के रहने वाले दिवंगत सैनिक चंदरमणि 1965 भारत-पाक युद्ध में घायल हुए थे जिससे उन्हें सेना छोड़नी पड़ी। दिवंगत सैनिक चंदरमणि की विधवा पत्नी को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से 60 साल बाद न्याय मिला।

केंद्र सरकार ने खारिज की याचिका

6 दशक से इंसाफ के लिए लड़ रही विधवा के पक्ष में हाईकोर्ट ने सशस्त्र बल अधिकरण के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने साल 1965 के युद्ध में गंभीर घायल हुए सैनिक की पत्नी को विशेष पारिवारिक पेंशन का हकदार माना है।

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