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November 8, 2025

सुक्खू सरकार के फैसले से IAS एसोसिएशन खफा, अन्य सेवाओं के अधिकारियों की तैनाती पर जताई नाराजगी

कैडर नियमों का उल्लंघन बता फैसले वापस लेने की मांग

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Government VS IAS Association

शिमला। हिमाचल प्रदेश IAS एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित किया है। इसमें कहा गया है कि सरकार ने IAS (कैडर) नियम, 1954 की धारा 9(1) का उल्लंघन किया है। एसोसिएशन ने सरकार के उन आदेशों पर आपत्ति जताई जिसके तहत कई प्रशासनिक सचिव पद जो IAS कैडर के हैं, उन पर अन्य सेवाओं के अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। एसोसिएशन ने इस फैसले को कैडर नियमों का उल्लंघन बताया है और तुरंत प्रभाव से इसे वापस लेने की मांग की है।

केंद्र सरकार से लेनी होती है अनुमति

नियम कहते हैं कि राज्य में IAS कैडर का पद किसी गैर कैडर अधिकारी से केवल अस्थायी रूप से और विशेष परिस्थिति में ही भरा जा सकता है। साथ ही अगर तीन महीने से ज्यादा अवधि के लिए किसी गैर कैडर अधिकारी को ऐसे पद पर रखना होता है तो पहले केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होती है।

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IAS एसोसिएशन का कहना है कि सचिवालय ढांचे में IAS अधिकारी नीति व कार्यक्रमों से जुड़े विभागों का संचालन करते हैं। वहीं अन्य अखिल भारतीय सेवाओं जैसे पुलिस सेवा व वन सेवा के अधिकारी अपने-अपने कार्यक्षेत्रों का नेतृत्व करते हैं। 

सेवाओं के बीच पैदा होगा असंतुलन 

ये परंपरा प्रशासनिक संतुलन व समन्वय पर आधारित है। अगर इस व्यवस्था में बदलाव होता है तो ये ना सिर्फ परंपरा के विपरीत है बल्कि इससे सेवाओं के बीच असंतुलन पैदा होगा और प्रशासनिक कार्यकुशलता पर भी असर पड़ेगा।

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कैडर प्रबंधन पर नकारात्मक असर 

एसोसिएशन ने कहा कि IAS कैडर में सचिव पदों को उच्च पदोन्नति के अवसरों के रूप में निर्धारित किया गया है। ऐसे पदों को अन्य सेवाओं को सौंपना IAS अधिकारियों के मनोबल, वरिष्ठता व कैडर प्रबंधन पर नकारात्मक असर डालता है। 

नहीं है पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया 

पत्र में उल्लेख किया गया कि सरकार द्वारा ये स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन प्रदर्शन मानकों के आधार पर IAS अधिकारियों को इन पदों के लिए अनुपयुक्त माना गया। एसोसिएशन ने कहा कि कोई स्पष्ट या पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया नहीं अपनाई गई जिससे भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी है। 

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एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि इन आदेशों पर फिर से विचार किया जाए और अगर प्रदर्शन के आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं तो पारदर्शी और लिखित मानदंड तय किए जाएं।

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