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November 7, 2025
सुक्खू सरकार की बढ़ेंगी मुश्किलें, सड़कों पर उतरेंगे एक लाख पेंशनर; दिया अल्टीमेटम
सुक्खू सरकार के खिलाफ लंबित भुगतान ना होने से भड़के पेंशनर
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मंडी। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार पहले से ही आर्थिक संकट और बढ़ते राजकोषीय दबाव से जूझ रही है, लेकिन अब सरकार के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। राज्य के एक लाख से अधिक पेंशनर सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी लंबित मांगों पर तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो आगामी धर्मशाला विधानसभा सत्र के दौरान प्रदेशभर से पेंशनर विधानसभा का घेराव करेंगे।
यह फैसला मंडी में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता समिति के चेयरमैन सुरेश ठाकुर ने की। बैठक विश्वकर्मा मंदिर मंडी में हुई, जिसमें 18 संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में वक्ताओं ने सरकार की लचर कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि सरकार सिर्फ खोखले आश्वासन दे रही है, जबकि पेंशनरों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
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सुरेश ठाकुर ने कहा कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को अब तक संशोधित ग्रेच्युटी, कम्युटेशन और लीव इनकैशमेंट का भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों के चिकित्सा बिलों का भी भुगतान अटका हुआ है। इतना ही नहीं पेंशनरों को 13 प्रतिशत महंगाई राहत (DA) और 111 महीनों का एरियर भी नहीं मिला है। सरकार हर बार सिर्फ भरोसा देती है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाती। उम्र के इस पड़ाव में हमें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
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बैठक में पेंशनर्स समिति ने सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। यदि इस अवधि में सरकार प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए नहीं बुलाती, तो समिति राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करेगी। सुरेश ठाकुर ने कहा कि पेंशनर अब कोरे आश्वासनों से तंग आ चुके हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह वित्तीय संकट का बहाना बनाकर बुजुर्ग कर्मचारियों के अधिकारों से खिलवाड़ कर रही है।
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बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने कहा कि वे अब और प्रतीक्षा नहीं करेंगे। हमने सम्मानपूर्वक जीवन बिताया है, पर अब सरकार हमें अपमानित कर रही है। यदि मांगे नहीं मानी गईं, तो हम विधानसभा सत्र के दौरान धर्मशाला में ऐतिहासिक विरोध दर्ज कराएंगे।
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हिमाचल प्रदेश सरकार पहले से ही राजस्व घाटे, कर्मचारियों के वेतन, और ऋण अदायगी जैसी समस्याओं से जूझ रही है। अब पेंशनरों का यह आंदोलन सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक संकट खड़ा कर सकता है। फिलहाल सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन सूत्रों के अनुसार वित्त विभाग पहले ही राजकोषीय स्थिति की गंभीरता को लेकर मुख्यमंत्री को रिपोर्ट दे चुका है। पेंशनरों का आंदोलन यदि बड़ा रूप लेता है, तो यह सुक्खू सरकार के लिए राजनीतिक परीक्षा साबित हो सकता है।