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April 15, 2025
हिमाचल डे स्पेशल: 77 साल में प्रदेश ने देखे कई उतार-चढ़ाव, हासिल किए बड़े मुकाम
हिमाचल पर 97 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है
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शिमला। हर साल 15 अप्रैल को हिमाचल दिवस पूरे उत्साह और गौरव के साथ मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, उसकी भौगोलिक विविधता और ऐतिहासिक यात्रा को याद करने का अवसर होता है। इस दिन राज्य के लोग अपनी पारंपरिक कलाओं, रीति-रिवाजों, संगीत, नृत्य और स्थानीय व्यंजनों को उत्सव के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
‘हिमाचल’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — ‘हिम’ अर्थात बर्फ और ‘आंचल’ अर्थात गोद। यानी बर्फ से ढकी गोद में बसा प्रदेश। इस नाम के पीछे भी एक खूबसूरत अर्थ छुपा है, जो इसकी भौगोलिक स्थिति को दर्शाता है।
हिमाचल प्रदेश केवल पर्वतों और घाटियों की भूमि नहीं, बल्कि यह एक जैव-विविधता का खजाना है।
- यहां 350 से अधिक पशु प्रजातियां
- 450 पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं।
इसके अलावा जास्कर, पीर पंजाल और धौलाधार जैसी पर्वत श्रृंखलाएं इसे और अधिक खास बनाती हैं।
- चैल क्रिकेट ग्राउंड, जो समुद्र तल से 8018 फीट की ऊंचाई पर है, दुनिया का सबसे ऊंचा क्रिकेट मैदान है।
- 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल छोटी-छोटी पहाड़ी रियासतों को मिलाकर अस्तित्व में आया था।
- 26 जनवरी 1950 को यह सी-श्रेणी का राज्य बना।
- 1 नवंबर 1965 को इसे केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा मिला
- अंततः 25 जनवरी 1971 को भारत का 18वां पूर्ण राज्य बना।
यहां हिंदी के साथ-साथ कई स्थानीय भाषाएं बोली जाती हैं, जैसे:
- महासू
- पहाड़ी
- मंडेली
- कांगड़ी
- कुल्लू
- बिलासपुरी
- किन्नौरी
हिमाचल की सांस्कृतिक विविधता इसकी बोलियों में साफ झलकती है।
- राज्य में कुल 12 जिले
- 4 लोकसभा सीटें, और
- 68 विधानसभा सीटें हैं।
राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि और पर्यटन है।
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1. आर्थिक संकट
राज्य की वित्तीय स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
- हिमाचल पर 97 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है।
- हर महीने वेतन, पेंशन, ऋण और ब्याज भुगतान के लिए लगभग 2800 करोड़ रुपये की जरूरत होती है।
राजस्व के सीमित स्रोतों के कारण यह सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
2. प्राकृतिक आपदाएं
पिछले दो वर्षों से हिमाचल को भारी बारिश, भूस्खलन और बर्फबारी जैसी आपदाओं का सामना करना पड़ा है।
- करोड़ों रुपये की संपत्ति नष्ट हो चुकी है।
- कई लोगों की जानें भी गई हैं।
राज्य को दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन योजना तैयार करनी होगी।
3. बेरोजगारी
70 लाख की आबादी वाले इस राज्य में 6.32 लाख से ज्यादा पंजीकृत बेरोजगार हैं।
- सरकारी विभागों में हजारों पद रिक्त हैं, लेकिन उन्हें भरा नहीं जा रहा।
- स्वरोजगार और कौशल विकास योजनाएं शुरू कर इस संकट से निपटा जा सकता है।