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January 28, 2026
हिमाचल पुलिस के 'नाटक' पर बवाल- कश्मीरी मुस्लिमों को निशाना बनाने का आरोप, गवर्नर तक पहुंचा मामला
पुलिस की टीम ने चिट्टे के खिलाफ पेश किया था नाटक
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शिमला। हिमाचल में गणतंत्र दिवस का मंच जहां देशभक्ति और एकता का प्रतीक माना जाता है, वहीं इस बार रिज मैदान से जुड़ा एक कार्यक्रम सियासी और सामाजिक विवाद के केंद्र में आ गया है। एक नाटक, जिसका मकसद नशे के खिलाफ संदेश देना बताया जा रहा है, अब सांप्रदायिक रंग देने के आरोपों में घिर गया है। मामला इतना बढ़ गया कि शिकायत सीधे राज्यपाल तक पहुंच गई है।
शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवार ने राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान प्रस्तुत एक स्किट पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को लिखित शिकायत भेजते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस द्वारा मंचित यह नाटक कश्मीरी मुसलमानों को निशाना बनाता हुआ प्रतीत होता है और यह संविधान की भावना के खिलाफ है।
टिकेंद्र पंवार ने कहा कि नाटक में जिस तरह के पात्र, भाषा और पहनावे को दिखाया गया, उससे एक विशेष समुदाय को जोड़कर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने मांग की है कि यह जांच की जाए कि इस स्किट की पटकथा किसने लिखी, किस स्तर पर इसे मंजूरी दी गई और गणतंत्र दिवस जैसे मंच पर इसे कैसे प्रस्तुत किया गया। उन्होंने इस चूक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
दरअसल, राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ‘एकलव्य कला मंच हिमाचल प्रदेश पुलिस प्रथम वाहिनी बनगढ़’ की ओर से चिट्टे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से यह नाटक प्रस्तुत किया गया था। स्किट में कुछ पात्रों को लाहौर में बैठकर भारतीय युवाओं को नशे का आदी बनाने की साजिश रचते हुए दिखाया गया था।
हालांकि स्किट में लोकेशन लाहौर बताई गई थी, लेकिन पंवार का आरोप है कि जिन पात्रों को दिखाया गया, उनकी वेशभूषा और बोली कश्मीरी मुसलमानों जैसी लगती थी, जिससे यह संदेश गया कि एक खास समुदाय को ड्रग तस्करी से जोड़ा जा रहा है।
पूर्व डिप्टी मेयर ने कहा कि नशा तस्करी किसी धर्म, जाति या समुदाय से नहीं जुड़ी होती। इसमें समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हो सकते हैं और इसके शिकार भी सभी वर्गों के लोग होते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इस तरह की प्रस्तुति समाज में नफरत और गलत धारणाएं फैला सकती है।
वहीं हिमाचल पुलिस विभाग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि स्किट का उद्देश्य केवल युवाओं को चिट्टे के खतरे के प्रति जागरूक करना था। किसी भी समुदाय को बदनाम करने का कोई इरादा नहीं था। पुलिस के अनुसार, स्किट में शुरुआत से ही लाहौर का उल्लेख किया गया था ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संदेश पाकिस्तान प्रायोजित ड्रग नेटवर्क को लेकर है, न कि किसी समुदाय को लेकर।