#उपलब्धि
January 27, 2026
हिमाचल: पिता का छूटा साथ... मां के संघर्षों को नहीं भूली बेटी, अब अधिकारी बन बढ़ाया मान
हिमाचल की बेटी ने सीमित संसाधनों से रचा इतिहास
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सुजानपुर। कहते हैं कि मजबूत इरादे और सच्ची मेहनत के आगे हालात भी घुटने टेक देते हैं। हिमाचल प्रदेश की बेटियां आज इस कहावत को बार.बार सच साबित कर रही हैं। हमीरपुर जिला के सुजानपुर की बेटी ने इसी कहावत को सच साबित करते सीमित संसाधनों के बावजूद आज कृषि विभाग में बड़ा हासिल कर लिया है। सुजानपुर शहर की आकांक्षा मेहरा ने सीमित संसाधनों, पारिवारिक जिम्मेदारियां और जीवन की कठिन परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत से आज अधिकारी बन गई है।
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इस पद को हासिल करने में सिर्फ अकांक्षा मेहरा ने ही संघर्ष नहीं किया, बल्कि उसकी मां ने भी बेटी को इस मुकाम तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पति का साथ छूटने के बाद बेटी के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई थी। लेकिन मां ने हार नहीं मानी और बेटी की पढ़ाई में किसी तरह की कोई रूकावट नहीं आने दी। इसके लिए उन्होंने दिन रात मेहनत की।
सुजानपुर के वार्ड नंबर.6 की रहने वाली आकांक्षा मेहरा का जीवन आसान नहीं रहा। पिता संजीव मेहरा के असमय निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां मां दया कुमारी के कंधों पर आ गईं। एक गृहिणी होने के बावजूद उन्होंने कभी अपनी बेटी की पढ़ाई को रुकने नहीं दिया। आर्थिक सीमाओं और सामाजिक चुनौतियों के बीच आकांक्षा ने भी हार मानने के बजाय पढ़ाई को अपना सबसे मजबूत हथियार बनाया।
कठिन हालात में भी आकांक्षा का लक्ष्य कभी डगमगाया नहीं। लगातार मेहनत, आत्मविश्वास और अनुशासन के बल पर उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। आज जब उनका चयन कृषि क्षेत्र अधिकारी के पद पर हुआ है, तो यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि संघर्ष और संकल्प की जीत मानी जा रही है।
आकांक्षा की सफलता की खबर मिलते ही सुजानपुर में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोग, सामाजिक संगठन और व्यापारी वर्ग उनके घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि आकांक्षा ने यह साबित कर दिया है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अगर हौसले मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है।
आकांक्षा मेहरा की उपलब्धि हिमाचल प्रदेश की उन तमाम बेटियों के लिए एक संदेश है, जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखती हैं। उनकी कहानी बताती है कि बेटियां आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और अवसर मिलने पर वे प्रदेश और समाज का नाम रोशन कर सकती हैं। आकांक्षा की यह सफलता न केवल एक परिवार की जीत है, बल्कि पूरे सुजानपुर और हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है-जहां बेटियां संघर्ष से निकलकर सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।