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August 29, 2025

हिमाचल: नहीं थम रहा DC चंबा और वकीलों के बीच का विवाद, कार्रवाई पर अड़ी बार एसोसिएशन

प्रशासन के खिलाफ बार एसोसिएशन का प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी

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चंबा। हिमाचल के चंबा जिला में उपायुक्त चंबा मुकेश रेप्सवाल के साथ हुए विवाद के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जिला बार एसोसिएशन चंबा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को भी पूरे जोश के साथ जारी रहा। चौगान क्षेत्र में सड़क पर बैठकर वकीलों ने प्रदर्शन किया और उपायुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बार एसोसिएशन की मांग है कि प्रशासन की लापरवाही और उपायुक्त के कथित दुर्व्यवहार के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए।

डीसी और वकीलों के बीच बढ़ता टकराव

बता दें कि गुरुवार को चंबा में चार दिनों से मोबाइल नेटवर्क और सड़क संपर्क ठप रहने को लेकर बार एसोसिएशन ने उपायुक्त से जवाब मांगा था। इस दौरान उपायुक्त और अधिवक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की में तब्दील हो गई। डीसी के कथित बयान "आप खुद व्यवस्था देख लीजिए" ने आग में घी का काम किया, जिससे अधिवक्ताओं में भारी रोष फैल गया।

 

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सड़क पर बैठकर किया चक्का जाम

घटना के बाद गुस्साए वकीलों ने चौगान क्षेत्र में धरना देते हुए चक्का जाम कर दिया, जिससे शहर में यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक डीसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती, उनका विरोध जारी रहेगा। अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन भरमौर और मणिमहेश में आई आपदा की सही जानकारी तक साझा नहीं कर रहा है।

चार दिन से नहीं कोई राहत, बोले बार अध्यक्ष

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मदन रावत ने कहा, “प्रशासन पूरी तरह विफल है। चार दिनों से चंबा का मोबाइल नेटवर्क ठप है, भरमौर की सड़कें बंद हैं, श्रद्धालु फंसे हुए हैं और किसी को निकालने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। जनता बेहाल है और प्रशासन मूक दर्शक बना बैठा है। हमने स्पष्ट कर दिया है कि डीसी की जवाबदेही तय होनी चाहिए।”

 

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पानी, भोजन और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित

चंबा में हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। पूरे जिले में पानी की आपूर्ति चार दिन से ठप है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज चंबा में भी हालात चिंताजनक हो चुके हैं। गुरुवार रात को पानी की कमी के कारण मरीजों के लिए भोजन तक नहीं बन पाया, जिससे मरीज और उनके परिजन रातभर भूखे रहे।

पठानकोट मार्ग से आंशिक राहत, लेकिन हालात गंभीर

वहीं, चंबा-पठानकोट मार्ग को एकतरफा यातायात के लिए खोला गया है, जिससे कुछ राहत मिली है। लेकिन सैकड़ों वाहन अब भी फंसे हुए हैं और मार्ग पर भारी जाम की स्थिति बनी हुई है। लोग प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली से बेहद नाराज हैं।

 

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प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

अधिवक्ताओं और आम नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन हर मोर्चे पर विफल रहा है। न तो आपदा राहत के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं, न ही प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। वकीलों का यह भी कहना है कि प्रशासन आम लोगों की पीड़ा को अनदेखा कर रहा है।

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