#विविध
January 30, 2026
हिमाचल की बागवानी पर संकट : यूरोपीय सेब हुआ सस्ता, PM मोदी से खफा हुए बागवान
अगले 10 साल तक लागू रहेगी यह व्यवस्था
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के बागवानों के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने यूरोपीय यूनियन (EU) के देशों से भारत आने वाले सेब पर आयात शुल्क कम कर दिया है। पहले इन सेबों पर करीब 50 फीसदी टैक्स लगता था, लेकिन अब इसे घटाकर सिर्फ 20 फीसदी कर दिया गया है। इस फैसले से हिमाचल के सेब उगाने वाले किसान काफी नाराज़ और परेशान हैं।
बागवानों का कहना है कि जब बाहर से सस्ता सेब भारत आएगा, तो हिमाचल का सेब बाजार में टिक नहीं पाएगा। उन्हें अपने सेब का सही दाम नहीं मिल पाएगा और उनकी साल भर की मेहनत बेकार हो जाएगी। पहले ही सेब की खेती में लागत काफी बढ़ चुकी है, ऊपर से अब विदेशी सेब से मुकाबला करना और मुश्किल हो जाएगा।
इससे पहले न्यूजीलैंड के सेब पर भी आयात शुल्क घटाया गया था। उस समय भी बागवानों ने विरोध किया था, लेकिन अब यूरोपीय देशों के सेब पर भी टैक्स कम कर दिया गया है। बागवानों का कहना है कि सरकार एक के बाद एक ऐसे फैसले ले रही है, जो सीधे तौर पर उनके नुकसान में जा रहे हैं।
वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार के मुताबिक यूरोपीय यूनियन से सिर्फ 50 हजार मीट्रिक टन सेब ही 20 फीसदी आयात शुल्क पर भारत आएगा। इसके अलावा इन सेबों की न्यूनतम कीमत 80 रुपये प्रति किलो तय की गई है,
ताकि बहुत सस्ता सेब बाजार में न पहुंचे। सरकार का दावा है कि इससे देश के किसानों को ज्यादा नुकसान नहीं होगा और बाजार में दाम भी संतुलित बने रहेंगे। यह व्यवस्था अगले 10 साल तक लागू रहेगी।
लेकिन बागवान सरकार की बातों से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जब एक बार टैक्स कम कर दिया जाता है, तो धीरे-धीरे आयात बढ़ने लगता है। आज 50 हजार टन है, कल यह मात्रा एक लाख टन तक पहुंच सकती है। इससे बाजार में विदेशी सेब भर जाएगा और हिमाचल के सेब की मांग कम हो जाएगी।
आंकड़े भी बागवानों की चिंता को सही साबित करते हैं। साल 2024 में भारत ने करीब 5 लाख टन सेब बाहर के देशों से मंगाया था। इसमें सबसे ज्यादा सेब ईरान से आया, उसके बाद तुर्की और अफगानिस्तान का नंबर रहा। यूरोपीय यूनियन से फिलहाल कम मात्रा में सेब आता है, लेकिन अब ड्यूटी कम होने के बाद वहां से आयात तेजी से बढ़ने की आशंका है।
प्रदेश के नेता और किसान संगठन इस फैसले के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने साफ कहा है कि यूरोपीय देशों से सेब पर आयात शुल्क घटाना हिमाचल के बागवानों के हितों पर सीधा हमला है। इससे राज्य की सेब बागवानी तबाह हो सकती है। उन्होंने कहा कि पहले न्यूजीलैंड के सेब पर ड्यूटी घटाई गई और अब ईयू के सेब पर भी ऐसा ही किया जा रहा है। इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने भी इस फैसले को बागवान विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि सास्ता विदेशी सेब भारतीय बाजार में आने से स्थानीय किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। उनके मुताबिक केंद्र सरकार विदेशी सेब को बढावा दे रही है, जबकि देश के किसानों की अनदेखी की जा रही है।
वहीं, हिमाचल प्रदेश फल, फूल और सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि यह फैसला बागवानों के साथ सरासर अन्याय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का “वोकल फॉर लोकल” का नारा ऐसे फैसलों से खोखला साबित होता है।
हरीश चौहान ने बताया कि तुर्की और ईरान का सेब पहले ही 50 फीसदी आयात शुल्क के बावजूद 48 रुपये प्रति किलो तक भारत की मंडियों में पहुंच रहा है। ऐसे में अगर टैक्स और कम किया गया, तो हिमाचल के सेब को कौन पूछेगा।
कुल मिलाकर, प्रदेश के सेब बागवानों को डर है कि अगर सरकार ने विदेशी सेब को इसी तरह सस्ता बनाकर बाजार में उतार दिया, तो उनकी सालों की मेहनत, आमदनी और सेब की खेती सब पर बुरा असर पड़ेगा। बागवानों की मांग है कि सरकार अपने फैसले पर दोबारा विचार करे और देश के किसानों को पहले प्राथमिकता दे।