#विविध
July 17, 2026
हिमाचल में बदले बच्चा गोद लेने के नियम : परिवार या रिश्तेदारी में भी लेनी होगी कानूनी मंजूरी
NRI और विदेशी नागरिक भी कर सकते हैं आवेदन
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में दत्तक ग्रहण (एडॉप्शन) की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और कानूनी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब सिर्फ परिवार या रिश्तेदारी में आपसी सहमति से किसी बच्चे को गोद लेने की परंपरा पर्याप्त नहीं होगी।
राज्य में रिश्तेदारों के बीच होने वाले दत्तक ग्रहण के साथ-साथ सौतेले माता-पिता द्वारा बच्चे को गोद लेने के लिए भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इसके लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण करवाना जरूरी होगा। सभी औपचारिकताएं पूरी होने और जिला दंडाधिकारी की स्वीकृति मिलने के बाद ही बच्चे को कानूनी रूप से दत्तक संतान का दर्जा प्राप्त होगा।
शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि कई बार परिवारों में रिश्तेदारी के आधार पर बच्चे को गोद ले लिया जाता था। मगर कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण बाद में उत्तराधिकार, अभिभावकत्व, संपत्ति के अधिकार और अन्य कानूनी मामलों में विवाद पैदा हो जाते थे।
ऐसे मामलों में बच्चे के अधिकार भी प्रभावित होते थे। इसी को देखते हुए अब सभी प्रकार के दत्तक ग्रहण को कानूनी दायरे में लाया गया है। उन्होंने कहा कि अब सबसे पहले इच्छुक अभिभावकों को CARA के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
इसके बाद संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन, पात्रता की जांच और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। जब पूरी प्रक्रिया संतोषजनक पाई जाएगी, तभी जिला दंडाधिकारी दत्तक ग्रहण प्रमाणपत्र जारी करेंगे। यही प्रमाणपत्र बच्चे को कानूनी रूप से दत्तक संतान का दर्जा देगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि .ये पूरी प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क होगी। इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति इस प्रक्रिया के नाम पर पैसे की मांग करता है तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने की अपील भी की गई है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल ने बताया कि दत्तक ग्रहण के लिए आवेदन करने वाले अभिभावकों की पात्रता निर्धारित नियमों के अनुसार जांची जाएगी। रिश्तेदारी में होने वाले दत्तक ग्रहण के मामलों में बच्चे के जैविक माता-पिता या वैध अभिभावक की लिखित सहमति अनिवार्य होगी। इसके साथ ही सभी आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यदि बच्चा पांच वर्ष या उससे अधिक आयु का है, तो उसकी इच्छा और सहमति को भी महत्व दिया जाएगा। ऐसे मामलों में बच्चे की सहमति प्राप्त करना कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा, ताकि उसके हितों और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
नई व्यवस्था के तहत केवल रिश्तेदारी में ही नहीं, बल्कि ऐसे मामलों में भी यही नियम लागू होंगे, जहां बच्चे के जैविक माता या पिता के पुनर्विवाह के बाद सौतेले माता या पिता बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेना चाहते हैं। उन्हें भी CARA पोर्टल पर आवेदन कर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जिला दंडाधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद ही बच्चे को शिक्षा, पालन-पोषण, उत्तराधिकार और अन्य सभी वैधानिक अधिकार प्राप्त होंगे।
अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करना है। कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण होने पर बच्चे को अपने दत्तक माता-पिता की संपत्ति में अधिकार, शिक्षा, चिकित्सा सुविधा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सभी कानूनी संरक्षण प्राप्त होंगे। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार के पारिवारिक या संपत्ति संबंधी विवाद की संभावना भी काफी हद तक कम होगी।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने समाज के सक्षम और जागरूक लोगों से अपील की कि वे शिशु गृहों और बाल आश्रमों में रह रहे बच्चों को गोद लेने के लिए आगे आएं और उन्हें बेहतर भविष्य प्रदान करें। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार की चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट योजना के तहत 20 दिसंबर 2022 से 1 सितंबर 2025 तक कुल 25 बच्चों को नया परिवार मिल चुका है। यह योजना ऐसे बच्चों को सुरक्षित और पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी इंदु शर्मा ने बताया कि दत्तक ग्रहण के लिए केवल भारतीय नागरिक ही नहीं, बल्कि एनआरआई और विदेशी नागरिक भी निर्धारित नियमों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा विवाहित दंपती, पात्र एकल अभिभावक और अन्य योग्य आवेदक भी दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा उससे संबंधित नियमों के तहत संचालित की जाती है। इसकी निगरानी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन कार्यरत केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) करता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक दत्तक ग्रहण पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और बच्चे के सर्वोत्तम हित में हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से प्रदेश में दत्तक ग्रहण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी। इससे बच्चों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी और भविष्य में कानूनी विवादों की संभावनाएं भी कम होंगी। साथ ही, ऐसे परिवार जो किसी बच्चे को कानूनी रूप से अपना नाम और सुरक्षित भविष्य देना चाहते हैं, उन्हें भी स्पष्ट और व्यवस्थित प्रक्रिया उपलब्ध होगी।