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February 4, 2026
हिमाचल में एंबुलेंस बनी डिलीवरी रूम : अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही महिला ने जन्मा बेटा
अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी महिला की हालत
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में आज एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। जोत क्षेत्र के गांव डुगली में एक गर्भवती महिला ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही 108 एंबुलेंस के भीतर एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है।
एंबुलेंस स्टाफ ने समय पर निर्णय, सही प्रशिक्षण और सूझबूझ के चलते न सिर्फ सुरक्षित प्रसव करवाया, बल्कि जच्चा-बच्चा दोनों की जान भी सुरक्षित रखी। फिलहाल, दोनों जच्चा-बच्चा को अस्पताल में दाखिल किया गया है और दोनों स्वस्थ हैं।
जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह 108 एंबुलेंस कंट्रोल रूम को डुगली गांव से फोन आया। जिसमें बताया गया कि एक गर्भवती महिला को तेज प्रसव पीड़ा हो रही है और उसकी स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
सूचना मिलते ही एंबुलेंस को तुरंत मौके के लिए रवाना किया गया। दुर्गम और घुमावदार पहाड़ी रास्तों के बीच एंबुलेंस टीम महिला को लेकर चंबा मेडिकल कॉलेज की ओर बढ़ी। हालांकि, रास्ते में ही महिला की प्रसव पीड़ा अचानक असहनीय हो गई।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए एंबुलेंस में तैनात EMT अनूप कुमार और पायलट सुरेश कुमार ने बिना समय गंवाए एंबुलेंस को सुरक्षित स्थान पर रोका और मौके पर ही प्रसव करवाने का फैसला लिया। सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद दोनों कर्मचारियों ने अपने मेडिकल प्रशिक्षण और अनुभव का उपयोग करते हुए एंबुलेंस के भीतर ही सुरक्षित डिलीवरी करवाई।

कुछ ही देर में एंबुलेंस में नवजात की किलकारी गूंज उठी। महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, जिससे परिजनों ने राहत की सांस ली। प्रसव के तुरंत बाद EMT द्वारा मां और नवजात को आवश्यक प्राथमिक उपचार दिया गया। साथ ही उनकी स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरती गईं।
इसके बाद जच्चा और बच्चा दोनों को सुरक्षित चंबा मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों द्वारा की गई जांच में पुष्टि हुई कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों की हालत स्थिर है और कुछ समय तक निगरानी के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
यह कोई पहला मामला नहीं है। धर्मशाला में भी कुछ समय पहले एक महिला को जोनल अस्पताल से टांडा रेफर किया गया था। रास्ते में, एजुकेशन बोर्ड धर्मशाला के पास महिला की स्थिति बिगड़ गई। वहां भी 108 स्टाफ ने एम्बुलेंस में सुरक्षित डिलीवरी करवाई थी।
इन घटनाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि 108 एम्बुलेंस सेवा केवल आपातकालीन सहायता नहीं, बल्कि मां और नवजात के लिए जीवन की डोर बन चुकी है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद 108 स्टाफ की प्रशिक्षण, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी सराहनीय है।