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January 16, 2026

बड़ा देव कमरूनाग के गूर को गद्दी से हटाया: बारिश नहीं होने पर भक्तों ने लिया जरूरी फैसला

प्रार्थना के बावजूद भी नहीं हुई बारिश, किसान-बागवान परेशान

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मंडी। देवभूमि हिमाचल में इस समय सूखे का लंबा दौर लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ा रहा है। खासकर जिला मंडी के ग्रामीण और पर्वतीय इलाकों में हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। बारिश ना होने के कारण बड़ा देव कमरूनाग के भक्तों ने बड़ा फैसला लेते हुए गूर को गद्दी से हटा दिया है।

प्रार्थना के बावजूद नहीं हुई बारिश

दरअसल, बारिश न होने के कारण खेतों में बोई गई फसलें या तो पूरी तरह सूख चुकी हैं या फिर अंकुरण से पहले ही बर्बाद हो गई हैं। कई क्षेत्रों में हालात इतने खराब हैं कि किसानों को गेहूं की बुआई तक टालनी पड़ी है। खेतों में दरारें पड़ चुकी हैं और जलस्रोत भी लगातार सूखते जा रहे हैं।

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कमरूनाग के शरण में पहुंचे लोग

इसी सूखे और वर्षा की कामना को लेकर मंडी जिले की प्रसिद्ध कामरू घाटी के लोग अपने आराध्य देवता बड़ा देव कमरूनाग की शरण में पहुंचे थे। कमरूनाग देवता को क्षेत्र में वर्षा के देवता के रूप में विशेष मान्यता प्राप्त है।

 

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बारिश ना होने से लोग परेशान

सदियों से यहां यह विश्वास चला आ रहा है कि जब भी सूखा पड़ता है, देवता की विधिवत पूजा और परंपराओं के पालन से बारिश होती है। लेकिन इस बार श्रद्धालुओं की प्रार्थनाओं के बावजूद बारिश नहीं हुई, जिससे चिंता और गहरी हो गई।

 

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एकजुट होकर लिया फैसला

सूखे के लंबे दौर और लगातार असफल प्रार्थनाओं के बाद देव परंपराओं के अनुसार बड़ा निर्णय लिया गया। देवता कमेटी, सात गढ़ के लोग, श्रद्धालु और क्षेत्र के बुजुर्गों ने एकत्र होकर इस विषय पर गंभीर मंथन किया।

देव गूर को गद्दी से हटाया

देव परंपरा के अनुसार यदि लंबे समय तक बारिश न हो और गूर के माध्यम से देवता की कृपा प्राप्त न हो पाए, तो गूर को गद्दी से हटाने का प्रावधान है। इसी परंपरा का पालन करते हुए बड़ा देव कमरूनाग के वर्तमान गूर देवी सिंह को गद्दी से हटा दिया गया।

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तीन साल से कर रहे देव सेवा

देवता कमेटी के सदस्य चेतराम ने बताया कि बारिश की कामना को लेकर पहले चरण में धंग्यारा ग्लू में देव परंपरा के अनुसार पूर्व गुरों द्वारा प्रतिदिन धूप जलाई गई और परते (अन्न के दाने) लेकर देवता से प्रार्थना की गई। इन सभी धार्मिक प्रयासों के बावजूद जब वर्षा नहीं हुई, तो यह निर्णय लेना पड़ा।

 

चेतराम के अनुसार देवी सिंह बीते तीन वर्षों से देवता के गुर के रूप में सेवाएं दे रहे थे, लेकिन सूखे की स्थिति लंबे समय तक बने रहने के कारण परंपरा के तहत यह कठोर कदम उठाया गया।

(इस वीडियो में आप पूरी चर्चा सुन सकते हैं)

 

पुजारी बोधराज के घर ले जाई गई छड़ी

निर्णय के बाद देर शाम देवता की छड़ी को देवी सिंह के घर से विधिवत रूप से पुजारी बोधराज के घर ले जाया गया। अब देवता की पूजा-अर्चना पुजारी के घर से ही संपन्न होगी और देवता की छड़ी वहीं विराजमान रहेगी। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि इस परिवर्तन के बाद देवता प्रसन्न होंगे और जल्द ही बारिश होगी।

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किसान-बागवन बेहद परेशान

लंबे समय से बारिश न होने के कारण किसानों और बागवानों की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। गेहूं, मटर और अन्य रबी फसलों पर संकट मंडरा रहा है, वहीं सेब और अन्य फलदार पौधों को भी पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है। जलस्रोत सूखने से पशुपालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों की आखिरी उम्मीद देव आस्था से जुड़ी हुई है।

क्षेत्र में गहरी मान्यता

बड़ा देव कमरूनाग को लेकर क्षेत्र में गहरी धार्मिक मान्यता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कमरूनाग वास्तव में बर्बरीक थे, जो भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र माने जाते हैं। महाभारत युद्ध में उन्होंने हारने वाले पक्ष की ओर से युद्ध लड़ने का प्रण लिया था।

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उनकी अपार शक्ति को देखते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का रूप धरकर उनसे उनका शीश दान में मांग लिया, ताकि युद्ध का संतुलन बना रहे। बर्बरीक की इच्छा के अनुसार उनके कटे हुए शीश को एक ऊंचे पर्वत शिखर पर स्थापित किया गया, जिसे आज कमरूनाग पहाड़ी के नाम से जाना जाता है।

झील में अर्पित करते हैं सोना-चांदी

स्थानीय लोग उन्हें बड़े देव के नाम से पूजते हैं और अच्छी फसल, समय पर वर्षा और समृद्धि के लिए उनकी आराधना करते हैं। कमरूनाग मंदिर के पास स्थित पवित्र झील भी आस्था का बड़ा केंद्र है। मान्यता है कि पांडवों ने इस स्थान का निर्माण किया था। श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर इस झील में सोने-चांदी के गहने और सिक्के अर्पित करते हैं, जिन्हें देव संपत्ति माना जाता है।

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उम्मीद भरा फैसला...

आज जब पूरा क्षेत्र सूखे की मार झेल रहा है, तब देव परंपराओं के तहत लिया गया यह निर्णय लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आया है। किसान और बागवान आस लगाए बैठे हैं कि बड़ा देव कमरूनाग शीघ्र ही प्रसन्न होंगे और क्षेत्र में वर्षा होगी, जिससे सूखी धरती को जीवन मिल सकेगा।

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