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December 26, 2025

हिमाचल के इस कुंड में परियां करती है स्नान : भूत-प्रेत से मुक्ति और संतान सुख के लिए लोग आते है यहां

हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है ये कुंड

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Himachal Devi-Devta

कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश की देवभूमि में आस्था, प्रकृति और लोककथाओं का अनोखा संगम देखने को मिलता है। आज हम आपको हिमाचल के एक ऐसे कुंड के बारे बताएंगे- जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां परियां स्नान करने आती हैं।

भूत-प्रेत से मुक्ति और संतान सुख 

मान्यता है कि यहां स्नान करने से भूत-प्रेत से भी मुक्ति मिलती है और संतान सुख भी प्राप्त होता है। ऐसे में अपनी मुराद लेकर यहां पर दूर-दूर से लोग आते हैं। मुगल शासक अकबर भी यहां स्नान कर चुके हैं।

 

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इस कुंड में नहाती हैं परियां

हम बात कर रहे हैं कांगड़ा में स्थित अच्छर कुंड या अच्छरा कुंड- जहां स्वंय भैरो बाबा और हनुमान जी विराजित हैं। गुप्त गंगा के पास स्थित अच्छर कुंड को परियों और अपसराओं का कुंड भी कहा जाता है। मान्यता है कि जब सुबह के वक्त अंधेरा पूरी तरह छंटा नहीं होता और इंसान सो रहा होता है- उस समय हां परियां स्नान करने उतरती हैं।

स्नान करना मानते हैं सौभाग्य

इसी कुंड में गुप्त गंगा का पवित्र जल गिरता है और झरने की शक्ल लेता है- जिसमें लोग स्नान करना परम सौभाग्य मानते हैं। इस कुंड को लेकर मान्यता है कि जो लोग गंभीर बीमारियों से जूझ रहे होते हैं, जो प्रेत साया, मानसिक पीड़ा या असाध्य रोगों से ग्रस्त होते हैं, वे यहां स्नान कर लाभ पाते हैं। लेकिन सबसे बड़ी आस्था जुड़ी है संतान प्राप्ति से।

 

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भर जाती है सूनी गोद

जिन दंपतियों की गोद सूनी है, जो वर्षों से संतान की कामना कर रहे हैं, वे दूर-दूर से यहां आते हैं, विशेष रूप से रविवार और मंगलवार को महिलाएं यहां स्नान करती हैं और स्नान सुख की प्रार्थना करती है।

ब्रह्मामुहूर्त में मांगते हैं मुराद

यहां की परंपरा है कि भक्त रात भर यहीं रुकते हैं, सुबह ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करते हैं और फिर अपनी मुराद मांगते हैं। जिनकी मुराद पूरी हो जाती है, वे दोबारा यहां लौटते हैं और प्रसाद के तौर पर नई फसल अर्पित करते हैं।

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राजा को चार पुत्रों की प्राप्ति

धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार, राजा पुरु को स्वर्ग की प्राप्ति हो चुकी थी, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। तब भगवान इंद्र ने उन्हें धरती पर लौटकर अच्छर कुंड में स्नान करने का आदेश दिया। राजा पुरु ने यहां स्नान किया और इसके बाद उन्हें चार पुत्रों की प्राप्ति हुई।

अकवर ने भी किया था स्नान

इतना ही नहीं, मान्यता है कि मुगल शासक अकबर ने भी इस कुंड की शक्ति से प्रभावित होकर यहां स्नान किया था। यही वजह है कि अच्छर कुंड को हिंदू- मुस्लिम एकता का प्रतीक भी माना जाता है। यहां दोनों धर्मों के लोग एक ही आस्था से सिर झुकाते हैं।

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गुप्त गंगा से 200 सीढ़ियां नीचे स्थित

वहीं, अच्छर कुंड कांगड़ा में ब्रजेश्वरी मंदिर के पास, गुप्त गंगा से करीब 200 सीढ़ियां नीचे स्थित है। ये सीढ़ियां भी किसी ने यूं ही नहीं बनवाईं, कहते हैं, जिसकी मन्नत पूरी हुई, उसी भक्त ने ये सीढ़ियां बनवाकर श्रद्धा अर्पित की।

शक्तिशाली उर्जा का केंद्र है ये मंंदिर

यह स्थान सिर्फ एक कुंड नहीं है। यहां परियों और नरसिंह का मंदिर है, भैरव बाबा का मंदिर है, हनुमान जी का मंदिर है और पीर बाबा शामदार लखदाता का भी स्थान है। पुजारियों के अनुसार, यह पूरा क्षेत्र एक शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र है और अमावस्या, पूर्णिमा, ग्रहण और संक्रांति के दिन यहां स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।

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