#अव्यवस्था
February 27, 2026
हिमाचल में गजब का घोटाला! 11 माह बंद रहे कॉलेज का 6.84 लाख आया बिजली-फोन बिल, ऑडिट में खुलासा
उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक की चेतावनी, गड़बड़ी होने पर अधिकारियों से होगी रिकवरी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को चौंका दिया है। प्रदेश के एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान जो करीब 11 महीने बंद रहा उसका बिजली और टेलीफोन बिल साढ़े छह लाख रुपये से भी अधिक आया है। बंद कॉलेज का भारी भरकम बिल आना अब बड़े वित्तीय घोटाले की आशंका को जन्म दे रहा है। इस भ्रष्टाचार का खुलासा ऑडिट के दौरान हुआ है।
मिली जानकारी के अनुसार यह भ्रष्टाचार का मामला प्रदेश के बड़े शिक्षण संस्थान (राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला) आरकेएमवी कॉलेज शिमला से सामने आया है। यहां ऑडिट विभाग की जांच के दौरान चौंकाने वाली वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार कोविड लॉकडाउन के दौरान संस्थान लंबे समय तक बंद रहा, इसके बावजूद बिजली और दूरसंचार सेवाओं पर लाखों रुपये खर्च किए गए। ऑडिट टीम ने इस खर्च को असामान्य बताते हुए इसे गंभीर जांच का विषय माना है।
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ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मार्च 2020 से फरवरी 2021 तक कॉलेज परिसर, हॉस्टल और कार्यालय गतिविधियां लगभग ठप थीं। बावजूद इसके छात्र निधि और हॉस्टल फंड से करीब 6.83 लाख रुपये के बिजली और टेलीफोन बिलों का भुगतान किया गया। हैरानी की बात यह है कि जब संस्थान 11 महीने तक बंद रहा, तब इतनी भारी राशि का बिल आना वित्तीय प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े करता है और संभावित भ्रष्टाचार की आशंका को मजबूत करता है।
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राज्य ऑडिट विभाग ने अपनी आपत्ति में स्पष्ट किया कि बंद पड़े संस्थान में बिजली और संचार खर्च न्यूनतम होना चाहिए था। ऐसे में लाखों रुपये का भुगतान प्रशासनिक लापरवाही या वित्तीय अनियमितता की ओर संकेत करता है। ऑडिट टीम ने कॉलेज प्रशासन से खर्च का पूरा रिकॉर्ड और ठोस स्पष्टीकरण मांगा है।
मामले की जांच के दौरान ऊना जिले के अंब स्थित सरकारी कॉलेज में भी अनियमितता सामने आई। यहां हिमाचली बोनाफाइड छात्राओं के लिए ट्यूशन फीस माफ होने के बावजूद उनसे फीस वसूले जाने का मामला ऑडिट में दर्ज किया गया है। इससे शिक्षा संस्थानों में वित्तीय नियमों के पालन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक अमरजीत कुमार शर्मा ने मामले को गंभीर बताते हुए संबंधित कॉलेज प्रबंधन से विस्तृत जवाब तलब करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में वित्तीय गड़बड़ी या नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो जिम्मेदार अधिकारियों से राशि की रिकवरी भी की जाएगी।
कॉलेज प्रशासन ने फिलहाल आंतरिक जांच शुरू करने की बात कही है और जल्द रिपोर्ट सौंपने का दावा किया है। हालांकि, 11 महीने बंद रहे संस्थान का करीब सात लाख रुपये का बिल सामने आने के बाद यह मामला अब शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है।