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May 1, 2025

आंदोलनकारी टीचरों पर सुक्खू सरकार की टेढ़ी नजर- शिक्षकों ने भी दी सीधी चेतावनी, जानें

ब्रॉडबैंड और सिम कार्ड नहीं मिले तो प्रदेशभर में डिजिटल बहिष्कार की चेतावनी

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के प्राथमिक शिक्षक सरकार से आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ (PTF) ने शिक्षा विभाग को 15 दिन का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि तय समय में स्कूलों में ब्रॉडबैंड और इंटरनेट सिम कार्ड की व्यवस्था नहीं की गई, तो प्रदेशभर के शिक्षक ऑनलाइन काम पूरी तरह से बंद कर देंगे।

इंटरनेट की कोई सुविधा नहीं

TF अध्यक्ष जगदीश शर्मा ने साफ किया कि स्कूलों में डिजिटल संसाधनों की हालत बेहद खराब है। अधिकांश टैबलेट खराब हैं और ब्रॉडबैंड या इंटरनेट की कोई सुविधा नहीं है। इसके बावजूद शिक्षकों पर ऐप से काम करने का दबाव है। उन्होंने कहा कि टीचर अपने मोबाइल डेटा से काम कर रहे हैं, जो आर्थिक और तकनीकी दोनों ही स्तर पर अनुचित है।

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शिमला धरने के बाद निलंबन

बीते 26 अप्रैल को शिक्षक संघ ने शिमला के चौड़ा मैदान में शिक्षा निदेशालय के पुनर्गठन के विरोध में शांतिपूर्ण धरना दिया था। लेकिन इसके बाद सरकार ने सख्ती दिखाते हुए 10 शिक्षकों को सस्पेंड किया और कई पर एफआईआर दर्ज की गई। PTF ने आरोप लगाया कि धरना शांतिपूर्ण था, और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। इसके बावजूद विभाग ने दमनकारी रवैया अपनाया है। संघ ने यह भी दोहराया कि अगर सरकार बातचीत के लिए बुलाती है, तो वे तैयार हैं, लेकिन झुकेंगे नहीं।

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जिला स्तर पर जुटाया जा रहा रिकॉर्ड


दूसरी ओर शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि दो सप्ताह के भीतर उन शिक्षकों की सूची तैयार की जाए जिन्होंने 26 अप्रैल को बिना छुट्टी लिए प्रदर्शन में भाग लिया। यह काम जिला उपनिदेशकों को सौंपा गया है। हाजिरी रिकॉर्ड के साथ-साथ शिमला में हुए प्रदर्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग को भी खंगाला जा रहा है ताकि यह पुष्टि की जा सके कि कौन-कौन शिक्षक मौके पर मौजूद थे

 

अप्रैल के वेतन पर नहीं होगी कटौती


शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि अप्रैल महीने के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी, लेकिन मई की तनख्वाह जारी होने से पहले यह कटौती अमल में लाई जाएगी। साथ ही प्रदर्शन में भाग लेने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

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धरने के बाद बढ़ा शिक्षकों पर शिकंजा


बता दें कि 26 अप्रैल को शिक्षा निदेशालय के पुनर्गठन और अन्य मांगों को लेकर प्रदेशभर से आए हजारों प्राथमिक शिक्षक शिमला के चौड़ा मैदान में एकत्र हुए थे। इस प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग ने पहले ही 10 शिक्षकों को सस्पेंड किया था और कई पर एफआईआर भी दर्ज की गई थी। अब वेतन कटौती की कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि सरकार इस बार किसी भी दबाव में आने के मूड में नहीं है।

 

संघ ने दी चेतावनी


इधर प्राथमिक शिक्षक संघ (PTF) ने चेतावनी दी है कि अगर शिक्षकों पर इस तरह की दबाव वाली कार्यवाहियां बंद नहीं की गईं तो वे राज्य भर में ऑनलाइन काम का बहिष्कार कर सकते हैं।

शिक्षकों को नहीं मिला निदेशालय पुनर्गठन पर भरोसा

प्रदेश में लगभग 22 हजार प्राथमिक शिक्षक हैं। उनका कहना है कि शिक्षा निदेशालय के पुनर्गठन से पहले उनसे कोई राय नहीं ली गई। शिक्षकों को आशंका है कि यह प्रक्रिया उनके अधिकारों को सीमित करने के लिए की जा रही है। उन्होंने शिक्षा मंत्री और सचिव के साथ हुई बैठकों की प्रोसिडिंग सार्वजनिक न किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।संघ ने यह भी चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस नहीं लेंगे।

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क्या कहते हैं कर्मचारी नेता

हिमाचल के कर्मचारी नेता हीरा लाल वर्मा ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 19(1) हर कर्मचारी को यूनियन बनाने, मांगें उठाने और सरकार की नीतियों की आलोचना करने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मांगें जायज़ हैं और सरकार को इस मसले पर संवाद की पहल करनी चाहिए।

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