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July 12, 2026

अगस्त में होगा हिमाचल विस मानसून सत्र- खाली मंत्री पद और डिप्टी स्पीकर पर फैसला जल्द

बारिश से हुए नुकसान पर सरकार को घेरने की तैयारी

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शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र अगस्त के दूसरे या तीसरे हफ्ते में शुरू होने की संभावना है। स्वतंत्रता दिवस के बाद सत्र बुलाए जाने की तैयारी चल रही है।

हिमाचल कैबिनेट की बैठक

सत्र की तिथियों पर अंतिम निर्णय 20 जुलाई को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में लिया जा सकता है। इस बार भी सत्र लंबा चलने के संकेत हैं, जिसमें बारिश से हुए नुकसान से लेकर प्रदेश के राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों तक कई अहम विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

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कब शुरू होगा मानसून सत्र?

हिमाचल प्रदेश विधानसभा का आगामी मानसून सत्र इस बार भी राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। प्रारंभिक तैयारियों के अनुसार सत्र 17 अगस्त या 24 अगस्त से शुरू हो सकता है। हालांकि सत्र की अवधि और अंतिम कार्यक्रम को लेकर सरकार 20 जुलाई को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में अंतिम फैसला ले सकती है।

10 से 12 बैठकें होंगी

सूत्रों के अनुसार, इस बार मानसून सत्र में 10 से 12 बैठकें आयोजित किए जाने की संभावना है। इनमें से दो दिन गैर-सरकारी सदस्य कार्य दिवस के लिए निर्धारित किए जा सकते हैं। पिछले वर्ष भी मानसून सत्र लगभग दो सप्ताह तक चला था, जिसमें कुल 12 बैठकें हुई थीं। ऐसे में इस बार भी लंबा और महत्वपूर्ण सत्र होने की संभावना जताई जा रही है।

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डिप्टी स्पीकर और मंत्री पद पर टिकी रहेंगी निगाहें

इस बार के सत्र का सबसे चर्चित विषय विधानसभा के नए उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) का चयन और राज्य मंत्रिमंडल में रिक्त पड़े एक मंत्री पद को भरना भी हो सकता है। कांग्रेस संगठन में बदलाव के बाद विधानसभा उपाध्यक्ष का पद खाली है, जिसे भरने को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है।

अटकलों का दौर जारी

राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि कांग्रेस हाईकमान की सहमति के बाद डिप्टी स्पीकर और मंत्री पद के लिए कई नामों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और सरकार के स्तर पर लिया जाएगा। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में लगातार अटकलों का दौर जारी है।

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बारिश से हुए नुकसान पर सरकार को घेरने की तैयारी

मानसून सत्र में इस वर्ष की भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का मुद्दा प्रमुखता से उठने की संभावना है। हाल के दिनों में प्रदेश के कई जिलों में बादल फटने, भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ और सड़कें क्षतिग्रस्त होने जैसी घटनाओं ने जनजीवन को प्रभावित किया है। ऐसे में विपक्ष सरकार से राहत, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन को लेकर जवाब मांग सकता है।

राहत पैकेज का मुद्दा

दूसरी ओर सरकार भी केंद्र से अपेक्षित विशेष राहत पैकेज के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। सरकार का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से हुए व्यापक नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र से विशेष आर्थिक सहायता की आवश्यकता है।

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अर्थव्यवस्था और विकास योजनाओं पर भी होगी बहस

विधानसभा के मानसून सत्र में प्रदेश की कानून व्यवस्था, आर्थिक स्थिति, रोजगार, विकास योजनाओं और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियों और विकास कार्यों का पक्ष सदन में रखेगी।

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