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September 8, 2026
हिमाचल के लिए आज बड़ा दिन- पूरी तरह साक्षर हुआ प्रदेश, दिल्ली में शिक्षा मंत्री लेंगे सम्मान
इंटरनेशनल लिटरेसी डे पर मिलेगा हिमाचल को बड़ा सम्मान
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शिमला। जिस हिमाचल प्रदेश में आजादी के समय साक्षरता दर महज करीब 5 प्रतिशत थी, वही प्रदेश अब लगभग पूरी तरह साक्षरता हासिल करने वाले राज्यों में शामिल हो चुका है। शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक किए गए प्रयासों का नतीजा अब राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के रूप में सामने आया है।
‘इंटरनेशनल लिटरेसी डे’ के मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश को पूर्ण साक्षरता हासिल करने के लिए सम्मानित किया जाएगा। प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर इस सम्मान को ग्रहण करेंगे। उन्हें कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर भी आमंत्रित किया गया है।
हिमाचल प्रदेश की वर्तमान साक्षरता दर 99.5 प्रतिशत बताई गई है। इस उपलब्धि के साथ प्रदेश देश में साक्षरता के मामले में गोवा के बाद दूसरे स्थान पर है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल के लिए यह उपलब्धि इसलिए खास है, क्योंकि आजादी के बाद प्रदेश देश के सबसे कम साक्षर राज्यों में शामिल था। वहां से लगभग पूर्ण साक्षरता तक पहुंचना आसान सफर नहीं रहा।
रोहित ठाकुर के मुताबिक, आजादी के समय देश की साक्षरता दर करीब 13 प्रतिशत थी, जबकि हिमाचल में यह आंकड़ा लगभग 5 प्रतिशत था। इसके बाद शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में लगातार काम किया गया। प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार ने शिक्षा के लिए मजबूत आधार तैयार किया। बाद की सरकारों ने भी इस क्षेत्र में निवेश और विस्तार को प्राथमिकता दी।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद 1960 और 1970 के दशक में हिमाचल सरकारें अपने बजट का करीब 18 से 20 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च करती थीं। उनके अनुसार, यह खर्च पंजाब और हरियाणा जैसे अपेक्षाकृत आर्थिक रूप से मजबूत राज्यों की तुलना में भी काफी अधिक था। इसी तरह के लगातार निवेश ने प्रदेश में शिक्षा का ढांचा मजबूत करने में भूमिका निभाई।
रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल अब साक्षरता के मोर्चे पर बड़ी चुनौती पार कर चुका है। अब सरकार के सामने अगला लक्ष्य शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करना और सरकारी स्कूलों-कॉलेजों की व्यवस्था को मजबूत बनाना होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति, तबादलों और संस्थानों की कार्यप्रणाली में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए राजनीतिक हस्तक्षेप न्यूनतम होना चाहिए। विशेष रूप से शिक्षकों के तबादलों को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने शिक्षकों के लिए उचित ट्रांसफर पॉलिसी और निश्चित कार्यकाल की वकालत की। उनका कहना है कि शैक्षणिक सत्र के बीच शिक्षकों के तबादले नहीं होने चाहिए। साथ ही नियमित नियुक्तियों को बढ़ावा देने और बैकडोर एंट्री रोकने पर भी जोर दिया।
कम होती छात्र संख्या भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। शिक्षा मंत्री के अनुसार, राज्य में करीब 1500 स्कूलों को बंद, मर्ज या डाउनग्रेड करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि नए शिक्षण संस्थान खोलने का आधार राजनीतिक दबाव नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरत और विद्यार्थियों की संख्या होनी चाहिए।
रोहित ठाकुर ने बताया कि पिछले 15 वर्षों में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या करीब चार लाख कम हुई है। इसे उन्होंने सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया। अब सरकार के सामने सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और सरकारी शिक्षण संस्थानों में लोगों का भरोसा मजबूत करने की चुनौती है।
हिमाचल के लिए लगभग पूर्ण साक्षरता तक पहुंचना निश्चित तौर पर बड़ी उपलब्धि है। लेकिन सरकार के सामने अब इससे आगे की तस्वीर भी साफ है। लक्ष्य सिर्फ लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाने तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में बेहतर शिक्षा, पर्याप्त शिक्षक और मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी होगा।