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August 6, 2026

सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला : विधायकों को नहीं मिलेंगे 2-2 PSO, फिजूलखर्ची बता टाली बात

उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया फैसला, 20 से अधिक मामलों पर हुई समीक्षा

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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने तीन विधायकों को अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग स्वीकार नहीं की है। दो भाजपा और एक कांग्रेस विधायक ने अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक और गनमैन तैनात करने का अनुरोध किया था।

CM सुक्खू ने ठुकराया विधायकों का प्रस्ताव

सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और सुरक्षा समीक्षा समिति की सिफारिश के बाद सरकार ने इन प्रस्तावों को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में इन जनप्रतिनिधियों के लिए पहले से उपलब्ध सुरक्षा पर्याप्त मानी गई है।

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विधायकों ने जताया था खतरे का अंदेशा

जानकारी के अनुसार, कांगड़ा, बिलासपुर और ऊना जिलों से जुड़े तीनों विधायकों ने सरकार को भेजे अपने अनुरोध में दावा किया था कि उन्हें जान का खतरा है। उनका कहना था कि फिलहाल तैनात एक गनमैन पर्याप्त नहीं है, इसलिए सुरक्षा बढ़ाते हुए एक अतिरिक्त गनमैन उपलब्ध कराया जाए।

सुरक्षा एजेंसियों ने नहीं मानी बात

 इसके बाद मामला सुरक्षा एजेंसियों के पास भेजा गया, जहां खतरे के स्तर का विस्तृत आकलन किया गया। राज्य की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों ने तीनों मामलों की अलग-अलग समीक्षा की। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि मौजूदा समय में ऐसा कोई ठोस सुरक्षा जोखिम सामने नहीं आया है- जिसके आधार पर अतिरिक्त गनमैन की आवश्यकता उचित ठहराई जा सके। इसी आकलन के आधार पर सुरक्षा समीक्षा समिति ने भी अतिरिक्त सुरक्षा देने की सिफारिश नहीं की।

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उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया फैसला

बुधवार को हिमाचल प्रदेश सचिवालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव आर.डी. नजीम की अध्यक्षता में सुरक्षा समीक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, CID के IG संतोष पटियाल सहित केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (IB) के अधिकारियों ने भी भाग लिया। विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त इनपुट और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद समिति ने निर्णय लिया कि संबंधित विधायकों को मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था में किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं है।

20 से अधिक मामलों पर हुई समीक्षा

बैठक में केवल विधायकों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि 20 से अधिक अन्य मामलों पर भी विचार किया गया। राष्ट्रपति निवास रिट्रीट, छराबड़ा की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। समिति ने वहां लागू सुरक्षा प्रबंधों को संतोषजनक बताते हुए उन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप माना।

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सुरक्षा पर बढ़ते खर्च पर भी हुई चर्चा

बैठक के दौरान सरकारी सुरक्षा व्यवस्था पर आने वाले खर्च का मुद्दा भी सामने आया। अधिकारियों ने बताया कि एक गनमैन की तैनाती पर सरकार का औसतन करीब 70 हजार रुपये प्रतिमाह खर्च होता है। ऐसे में यदि बिना पर्याप्त आवश्यकता के अतिरिक्त सुरक्षा दी जाती है तो सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है।

फिजूलखर्ची बता टाली बात

इस दौरान यह सुझाव भी सामने आया कि जिन मामलों में सरकारी सुरक्षा अनिवार्य न हो, वहां आवश्यकता के अनुसार निजी सुरक्षा लेने या कुछ परिस्थितियों में सुरक्षा का खर्च संबंधित व्यक्ति से लेने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।

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सुरक्षा खर्च की वसूली

सुरक्षा समीक्षा समिति ने एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पूर्व DGP संजय कुंडू के साथ विवाद से चर्चा में आए निशांत शर्मा को पहले उपलब्ध कराई गई सुरक्षा पर हुए सरकारी खर्च की वसूली करने का फैसला भी किया। समिति का मत था कि उस सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता उचित नहीं थी, इसलिए उस पर हुआ खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।

डॉक्टर का आवेदन भी खारिज

इसके अलावा एक चिकित्सक द्वारा सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए दिया गया आवेदन भी समिति ने अस्वीकार कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्णय केवल वास्तविक खतरे के आकलन के आधार पर ही लिया जाएगा।

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