#अपराध
August 6, 2026
हिमाचल में बंगाली झोलाछाप डॉक्टर : क्लीनिक में मिली कई दवाइयां, मरीज बनीं अफसर ने पकड़ा
गांव में खोला था क्लीनिक- कई लोग आते थे इलाज करवाने
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मंडी। हिमाचल प्रदेश में चल रहे एक अवैध क्लीनिक से जुड़ा मामला सामने आया है। मंडी जिले में बिना वैध लाइसेंस एलोपैथिक दवाओं का कारोबार करने वाले एक कथित चिकित्सक के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन को सूचना मिली थी कि सुंदरनगर क्षेत्र के पौड़ाकोठी में एक व्यक्ति बिना किसी वैध अनुमति के क्लिनिक संचालित कर रहा है और वहां एलोपैथिक दवाओं की बिक्री की जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए ड्रग इंस्पेक्टर रीना कुमारी के नेतृत्व में कार्रवाई की योजना बनाई गई।
इस दौरान विभाग, स्थानीय पुलिस और स्वतंत्र गवाहों को साथ लेकर संयुक्त टीम का गठन किया गया। सूचना की पुष्टि करने के लिए टीम ने पहले एक सदस्य को मरीज के रूप में क्लिनिक भेजा। वहां दवाएं उपलब्ध कराए जाने के बाद टीम ने तुरंत मौके पर छापेमारी की।
जांच के दौरान क्लिनिक संचालक ने अपनी पहचान संजीत कुमार राय, निवासी पश्चिम बंगाल, के रूप में बताई। क्लिनिक की तलाशी लेने पर अधिकारियों को विभिन्न प्रकार की एलोपैथिक दवाएं, सिरप, टैबलेट, कैप्सूल, इंजेक्शन और सिरिंज बरामद हुईं।
अधिकारियों ने जब संचालक से दवाओं की बिक्री और भंडारण से संबंधित वैध लाइसेंस मांगा तो वह कोई अधिकृत दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके अलावा वह स्वयं को पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी RMP साबित करने वाला प्रमाणपत्र भी नहीं दिखा पाया। दवाओं की खरीद और बिक्री का रिकॉर्ड मांगे जाने पर भी उसके पास सीमित रसीदों के अलावा कोई संतोषजनक दस्तावेज उपलब्ध नहीं था।
प्राथमिक जांच के आधार पर अधिकारियों ने मामला औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़ा पाया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए मामला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित धाराओं के तहत दायर आवेदन स्वीकार करते हुए जब्त दवाओं, दस्तावेजों और अन्य सामग्री की कस्टडी जांच अधिकारी एवं ड्रग इंस्पेक्टर को सौंपने की अनुमति दे दी।
न्यायालय ने आदेश दिया कि जब्त की गई सभी दवाओं और अन्य सामग्री का विधिवत फोटोग्राफिक रिकॉर्ड तैयार किया जाए तथा उनकी विस्तृत सूची बनाई जाए। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए कि न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना जब्त सामग्री को नष्ट या निपटाया नहीं जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि बिना लाइसेंस दवाएं कहां से लाई जा रही थीं, उनका वितरण किन लोगों तक हो रहा था और क्या इस गतिविधि में अन्य लोगों की भी भूमिका है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।