#यूटिलिटी
September 9, 2026
हिमाचली धाम अब सिर्फ 100 रुपये में...ज्यादा रेट नहीं वसूल सकेंगे दुकानदार, जानें नए नियम
ग्राहकों को कीमत और मात्रा दोनों की जानकारी मिलेगी
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में ढाबों, होटलों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में खाना खाने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। जिला प्रशासन ने खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर अधिकतम दरें निर्धारित कर दी हैं।
अब दुकानदार, ढाबा संचालक और होटल मालिक निर्धारित कीमत से अधिक राशि ग्राहकों से नहीं ले सकेंगे। प्रशासन की ओर से तय की गई नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
जिला दंडाधिकारी राहुल कुमार ने हिमाचल प्रदेश जमाखोरी एवं मुनाफाखोरी निवारण आदेश, 1977 के तहत अलग-अलग खाद्य वस्तुओं और व्यंजनों के अधिकतम बिक्री मूल्य निर्धारित किए हैं। इस आदेश में सिर्फ खाने की कीमत तय नहीं की गई है, बल्कि कुछ प्रमुख व्यंजनों की प्लेट में दी जाने वाली न्यूनतम मात्रा भी स्पष्ट की गई है। इसका उद्देश्य ग्राहकों से अधिक पैसे वसूलने और कम मात्रा में खाना परोसने जैसी शिकायतों पर अंकुश लगाना है।
बिलासपुर की पारंपरिक पहचान से जुड़ी बिलासपुरी धाम को लेकर भी प्रशासन ने अधिकतम कीमत तय की है। पांच व्यंजनों वाली बिलासपुरी धाम की एक थाली के लिए ग्राहक से अधिकतम 100 रुपये लिए जा सकेंगे। इसी तरह-
प्रशासन ने मांसाहारी खाद्य पदार्थों की कीमतों को भी निर्धारित किया है। जैसे कि-
इस आदेश की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशासन ने कुछ व्यंजनों के लिए केवल कीमत ही तय नहीं की, बल्कि ग्राहक को मिलने वाली न्यूनतम मात्रा भी निर्धारित की है। इससे कम खाना देकर पूरी कीमत वसूलने की संभावना पर भी रोक लगाने की कोशिश की गई है। यानी ग्राहक को अब कीमत के साथ-साथ निर्धारित मात्रा मिलने का अधिकार भी रहेगा।
पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर भी प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। पैकेट पर जो अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP दर्ज है, उससे अधिक राशि ग्राहक से नहीं ली जा सकेगी। पैकेटबंद दूध मुद्रित MRP पर ही बेचना होगा। इसके अलावा शीतल पेय, ब्रेड और अन्य पैकेटबंद खाद्य सामग्री पर भी पैकेट पर अंकित मूल्य से अधिक वसूली नहीं की जा सकेगी। खुले पनीर की अधिकतम कीमत 350 रुपये प्रति किलो और खुले दही की अधिकतम दर 80 रुपये प्रति किलो तय की गई है।
नई व्यवस्था के तहत खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों, होटल और ढाबा संचालकों के लिए रेट लिस्ट प्रदर्शित करना भी अनिवार्य किया गया है। निर्धारित मूल्य सूची को प्रतिष्ठान के प्रवेश द्वार पर ऐसी जगह लगाया जाना होगा, जहां ग्राहक उसे आसानी से देख सके।
इस व्यवस्था का फायदा यह होगा कि ग्राहक खाना या कोई खाद्य पदार्थ खरीदने से पहले उसकी निर्धारित कीमत देख सकेगा। इससे बिल बनने के समय अतिरिक्त राशि वसूले जाने की स्थिति में विवाद की संभावना भी कम होगी।
प्रशासन ने ग्राहकों के हित में बिल या नकद रसीद देने की व्यवस्था को भी अनिवार्य किया है। ग्राहक की मांग पर दुकानदार या खाद्य प्रतिष्ठान संचालक को भुगतान की रसीद अथवा बिल उपलब्ध करवाना होगा।
बिल मिलने से ग्राहक के पास खरीदारी का प्रमाण रहेगा। यदि किसी प्रतिष्ठान में निर्धारित दर से अधिक पैसे लिए जाते हैं, तो ग्राहक इसी बिल के आधार पर शिकायत कर सकता है। इससे मनमानी कीमत वसूलने वाले कारोबारियों पर कार्रवाई करना भी प्रशासन के लिए आसान होगा।
प्रशासन की इस पहल का सीधा असर रोजाना ढाबों और खाद्य प्रतिष्ठानों में खाना खाने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। कई बार ग्राहक को किसी व्यंजन की वास्तविक कीमत या प्लेट में मिलने वाली मात्रा की जानकारी पहले से नहीं होती। ऐसे में बिल आने के बाद अधिक राशि वसूले जाने की शिकायत सामने आती है।
अब रेट लिस्ट को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने और निर्धारित मात्रा में भोजन उपलब्ध करवाने के निर्देश से ग्राहक पहले ही यह तय कर सकेगा कि उसे कौन-सा व्यंजन कितनी कीमत में और कितनी मात्रा में मिलेगा।
जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित ये दरें तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएंगी। ऐसे में बिलासपुर जिले में खाद्य पदार्थ बेचने वाले प्रतिष्ठानों को अब प्रशासन द्वारा तय अधिकतम कीमतों और अन्य नियमों का पालन करना होगा। ग्राहकों के लिए भी सलाह यही रहेगी कि खाना या खाद्य सामग्री खरीदने से पहले रेट लिस्ट देखें और भुगतान के बाद बिल या रसीद जरूर लें।