#अव्यवस्था
August 27, 2026
बिजली महादेव मंदिर में आस्था से खिलवाड़! शराब की सैकड़ों बोतलें मिलीं, 12 क्विंटल कचरा उठाया
मई 2025 में भी बिजली गिरने से मंदिर का शिवलिंग खंडित हुआ था।
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कुल्लू। जिस जगह श्रद्धालु भगवान शिव का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं, वहां अगर पूजा-पाठ की जगह शराब की खाली बोतलें और कूड़े के ढेर नजर आएं तो सवाल उठना लाजिमी है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले का प्रसिद्ध बिजली महादेव मंदिर इन दिनों कुछ ऐसी ही तस्वीर को लेकर चर्चा में है।
मंदिर परिसर और आसपास चलाए गए सफाई अभियान में भारी मात्रा में कचरा मिला। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि मंदिर के करीब 50 मीटर के दायरे में शराब की 600 से अधिक खाली बोतलें बरामद हुईं। धार्मिक आस्था के इस प्रमुख केंद्र में सामने आई यह स्थिति न केवल मंदिर की मर्यादा बल्कि पर्यावरण को लेकर भी चिंता बढ़ा रही है।
मंडी की पराशर ऋषि स्वच्छता सेना ने 24 और 25 अगस्त को बिजली महादेव मंदिर परिसर में सफाई अभियान चलाया। करीब 15 लोगों की टीम ने मंदिर और आसपास के क्षेत्र में सफाई की तो बड़ी मात्रा में कचरा इकट्ठा हुआ।
अभियान के दौरान कुल 12 क्विंटल कचरा एकत्र किया गया। इसमें पॉलीथीन, चिप्स के पैकेट और अन्य प्लास्टिक कचरे के साथ बड़ी संख्या में शराब की खाली बोतलें भी शामिल थीं।
स्वच्छता अभियान के दौरान मंदिर से महज करीब 50 मीटर के क्षेत्र में 600 से अधिक खाली शराब की बोतलें मिलने की बात सामने आई है। स्वच्छता सेना के नेतृत्वकर्ता धूमल ठाकुर ने मंदिर परिसर में इस तरह शराब की बोतलों का मिलना गंभीर चिंता का विषय बताया।
उनका कहना है कि धार्मिक स्थल पर आने वाले लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे इसकी पवित्रता और मर्यादा बनाए रखें। ऐसे में मंदिर के आसपास शराब की बोतलों का मिलना कई सवाल खड़े करता है।
सफाई अभियान के बाद एक और समस्या सामने आई। बड़ी मात्रा में एकत्र हुए कचरे के निस्तारण के लिए संस्था को कुल्लू जिले में उचित जगह नहीं मिल सकी। इसके चलते कचरे को मंडी लाना पड़ा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर बढ़ते कचरे के निपटारे को लेकर स्थानीय स्तर पर किस तरह की चुनौतियां मौजूद हैं।
पराशर ऋषि स्वच्छता सेना मंडी और कुल्लू जिलों के अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर समय-समय पर सफाई अभियान चलाती है। संस्था ने मंदिर कमेटी और प्रशासन से बिजली महादेव की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। वहीं मंदिर के पुजारी मदन के अनुसार मंदिर परिसर में मंदिर कमेटी और स्वयंसेवियों की ओर से समय-समय पर सफाई की जाती है।
बिजली महादेव मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि अपनी अनोखी मान्यता के लिए भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि भगवान बिजली महादेव लोगों के कष्ट अपने ऊपर लेते हैं और करीब 12 साल में एक बार मंदिर पर आकाशीय बिजली गिरती है।
मान्यता के अनुसार बिजली गिरने से शिवलिंग खंडित हो जाता है। इसके बाद पुजारी शिवलिंग के टूटे हिस्सों को एकत्र करते हैं और उन्हें जोड़ने के लिए आसपास के गांवों से मक्खन एकत्र किया जाता है। शिवलिंग के टुकड़ों पर मक्खन का लेप लगाकर उन्हें दोबारा जोड़ा जाता है। मई 2025 में भी बिजली गिरने से मंदिर का शिवलिंग खंडित हुआ था।
कुल्लू की खराहल घाटी में समुद्र तल से करीब 2,460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बिजली महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। मंदिर तक पहुंचने के लिए कुल्लू से करीब 14 किलोमीटर दूर चंसारी गांव तक जाना पड़ता है। इसके बाद लगभग तीन किलोमीटर का ट्रैक तय करके मंदिर पहुंचा जाता है।
बिजली महादेव को कुल्लू घाटी का रक्षक देवता भी माना जाता है। मंदिर साल में करीब नौ महीने श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है, जबकि 15 दिसंबर से 15 मार्च तक मंदिर बंद रहता है। मान्यता है कि इस अवधि में देवता तपस्या में लीन रहते हैं।
ऐसे में मंदिर परिसर में शराब की सैकड़ों बोतलों और 12 क्विंटल कचरे का मिलना सिर्फ सफाई की समस्या नहीं- बल्कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले लोगों की जिम्मेदारी पर भी बड़ा सवाल है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों से यही उम्मीद है कि देवभूमि के इन आस्था स्थलों की पवित्रता के साथ-साथ प्रकृति की खूबसूरती को भी बनाए रखें।