#अपराध
July 8, 2025
हिमाचल: प्राकृतिक आपदा के बीच सक्रिय हुआ वन माफिया, देवदार की अवैध तस्करी का भंडाफोड़
बादल फटने की तबाही के बीच वन माफिया ने शुरू किया जंगलों का दोहन
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चंबा। हिमाचल प्रदेश जहां एक ओर प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ असामाजिक तत्व इस विपदा को भी अपने फायदे का जरिया बना रहे हैं। चंबा जिले में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां बादल फटने और तबाही के बीच वन माफिया सक्रिय हो गए हैं और जंगलों से बहुमूल्य लकड़ी की तस्करी कर रहे हैं।
वन विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से इस तस्करी का भंडाफोड़ हुआ है। वन परिक्षेत्र मसरूंड की टीम ने कल्हेल क्षेत्र के डुलू मोड़ पर नाकाबंदी के दौरान एक पिकअप वाहन से देवदार लकड़ी के 31 स्लीपर बरामद किए हैं। इन लकड़ियों की बाजार में अनुमानित कीमत ढाई लाख रुपए बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र अधिकारी हितेश्वर नरियाल के नेतृत्व में एक विशेष अभियान चलाया गया था। विश्वसनीय सूचना मिलने पर डुलू मोड़ पर गश्त बढ़ाई गई और एक संदिग्ध पिकअप वाहन को रोका गया। जांच के दौरान वाहन में लदी लकड़ी के कोई वैध दस्तावेज मौजूद नहीं थे। वाहन में सवार दो लोगों से पूछताछ की गई, लेकिन वे तस्करी की लकड़ी के संबंध में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
वन विभाग ने तत्काल प्रभाव से लकड़ी जब्त कर ली और दोनों आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले की पुष्टि करते हुए डीएफओ चंबा कृतज्ञ कुमार ने कहा कि विभाग किसी भी स्थिति में वन संपदा की अवैध कटाई और तस्करी को बर्दाश्त नहीं करेगा।
बता दें कि हिमाचल इस समय प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। मंडी जिला के साथ साथ चंबा में भी बादल फटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। आज मंगलवार को भी चंबा जिला के चुराह उपमंडल के पंगोला नाले में बादल फटने की घटना सामने आई। तेज बारिश के बाद आए सैलाब में गडफरी.थली संपर्क मार्ग पूरी तरह बह गया है, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी चंबा जिले की टिकरीगढ़ और बघेईगढ़ पंचायतों में बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं। बघेईगढ़ में नकरोड़.चांजू सड़क पर बना पुल बह गया था, जिससे पूरे क्षेत्र में यातायात ठप हो गया था। वहीं, टिकरीगढ़ के बंधा नाले में उफान आने से स्थानीय किसानों की खेतीबाड़ी और निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा था।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि प्राकृतिक आपदा की गंभीर स्थिति में भी वन माफिया सक्रिय कैसे हैंघ् जब प्रशासन और विभागीय मशीनरी राहत और बचाव कार्य में जुटी है, तब कुछ लोग जंगलों को निशाना बनाकर हिमाचल की जैविक विरासत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब यह जरूरी हो गया है कि आपदा की स्थिति में तस्करों की इन गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाए और कानून को सख्ती से लागू किया जाएए ताकि संकट के समय राज्य की प्राकृतिक संपदा सुरक्षित रह सके।