#अपराध
February 18, 2025
कांगड़ा FORT के म्यूजियम में चोरी: रोशनदान से अंदर घुसे- चांदी और कई कीमती चीजें चुराई
एग्जॉस्ट-फैन के रास्ते अंदर घुसे शातिर
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक कांगड़ा किले के म्यूजियम में रविवार रात को चोरों ने एक बड़ी वारदात को अंजाम दिया। इस चोरी के मामले में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि चोरों ने कई बेशकीमती चीजें चोरी की है।
चोरों ने म्यूजियम के एग्जॉस्ट फैन को निकालकर अंदर प्रवेश किया और वहां से चांदी के खड़ाऊ (चांदी की चप्पल) समेत 30 बेशकीमती पुरातन वस्तुएं चुरा लीं। जिसके बाद मौके पर पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है।
पुलिस म्यूजियम में लगे पुराने CCTV कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है, लेकिन इन कैमरों की गुणवत्ता इतनी खराब है कि चोरों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। पुलिस के अनुसार, इस चोरी की घटना को दो लोगों ने अंजाम दिया है, जिनकी तलाश जारी है।
सूत्रों के अनुसार, चोरों ने जिन वस्तुओं की चोरी की है, उनमें राजा-महाराजाओं के समय की पुरानी रिवाल्वर, खड़ाऊ, चांदी के जेवरात, पूंजा का चांदी का कीमती सामान, विभिन्न धातुओं से बनी बेशकीमती वस्तुएं और चांदी की ट्रे शामिल हैं। इन वस्तुओं की असल कीमत का अंदाजा लगाना मुश्किल है, क्योंकि वे अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक महत्व की हैं।
कांगड़ा के थाना प्रभारी संजीव कुमार ने बताया कि जैसे ही चोरी की सूचना मिली, पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस अब CCTV फुटेज के माध्यम से चोरों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि चोरी की गई सभी वस्तुएं प्राचीन और दुर्लभ हैं, इसलिए इनकी वास्तविक कीमत का आकलन करना बेहद कठिन है।
बताते चलें कि कांगड़ा किले का ऐतिहासिक म्यूजियम हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है। पर्यटक यहां राजा-महाराजाओं के समय की पुरानी वस्तुएं देखने के लिए आते हैं और टिकट काटकर इन ऐतिहासिक धरोहरों को निहारते हैं। इस म्यूजियम में रखी वस्तुएं न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह प्रदेश के सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा भी हैं।
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कांगड़ा किला कटोच वंश के राजपूत परिवार द्वारा बनवाया गया था और यह प्रदेश में स्थित सबसे बड़ा और भारत में सबसे पुराने किलों में से एक माना जाता है। इस किले ने कई ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है। 1615 में, मुग़ल सम्राट अकबर ने इस किले पर घेराबंदी की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। 1620 में अकबर के पुत्र जहांगीर ने चंबा के राजा को मजबूर करके इस किले पर कब्जा कर लिया था।